2 अगस्त 2025 करेंट अफेयर्स हिंदी में – UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जरूरी जानकारी
🌧️ बाढ़ प्रवण क्षेत्रों में झुग्गियाँ – भारत की बढ़ती समस्या
स्रोत: The Hindu (TH)
📌 क्यों चर्चा में?
एक वैश्विक रिपोर्ट (Nature Cities) में बताया गया कि पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा झुग्गियाँ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भारत में हैं।
👉 ज़्यादातर ये झुग्गियाँ गंगा डेल्टा क्षेत्र में हैं, जहाँ हर साल बाढ़ आती है।
🌍 वैश्विक रुझान: बाढ़ और झुग्गियाँ
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भारत सूची में सबसे ऊपर – लगभग 15.8 करोड़ झुग्गी निवासी बाढ़ प्रवण क्षेत्रों में रहते हैं।
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भारत में 40% से ज़्यादा झुग्गी लोग शहरों या उपनगरों में रहते हैं जहाँ जल निकासी और बुनियादी ढांचा बहुत खराब है।
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भारत के बाद – इंडोनेशिया, बांग्लादेश, पाकिस्तान जैसे देशों में भी ऐसे हालात हैं।
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वैश्विक रूप से, झुग्गी निवासी 32% अधिक जोखिम में होते हैं बाढ़ क्षेत्रों में रहने के कारण।
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बाढ़ क्षेत्रों में ज़मीन सस्ती या अवैध होती है, इसलिए गरीब लोग मजबूरी में वहीं रहते हैं।
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मुंबई और जकार्ता जैसे शहरों में बाढ़ और झुग्गियों की दोहरी समस्या है।
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Global South (विकासशील देशों) में हर 3 में से 1 झुग्गी बाढ़ से प्रभावित होती है।
🌊 बाढ़ से झुग्गी वासियों को ज्यादा नुकसान:
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नौकरी चली जाती है
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घर छिन जाते हैं
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इलाज और स्कूलों तक नहीं पहुंच पाते
कारण: कम शिक्षा, बीमा नहीं, आर्थिक तंगी
🌊 भारत में बाढ़ क्यों ज़्यादा होती है?
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नदी बाढ़:
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गंगा, ब्रह्मपुत्र, कृष्णा जैसी नदियाँ भारी बारिश या ग्लेशियर पिघलने पर उफान पर आ जाती हैं।
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हिमालयी क्षेत्र ज्यादा संवेदनशील होते हैं।
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शहरी विस्तार:
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बड़े शहर जैसे मुंबई, बेंगलुरु – नदी तटों पर फैल रहे हैं।
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1985-2015 के बीच भारत तीसरे नंबर पर रहा बाढ़ क्षेत्रों में निर्माण करने में।
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फ्लैश फ्लड्स में बढ़ोतरी:
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अचानक तेज़ बाढ़ की घटनाएँ बढ़ी हैं।
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उदाहरण:
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हिमाचल प्रदेश (2025)
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वायनाड, केरल (2024)
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सिक्किम (2023)
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जलवायु परिवर्तन:
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1981–2020 के बीच अत्यधिक वर्षा दोगुनी हो गई।
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मानसून की बारिश में 56% की बढ़ोतरी।
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शहरों की खराब ड्रेनेज:
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दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु में सीवरेज पुराना और बंद।
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चेन्नई 2015 बाढ़ में प्लास्टिक से भरे नाले कारण स्थिति बिगड़ी।
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स्थानीय योजना की कमी:
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बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए शहरों के पास कोई विशेष योजना नहीं।
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🏘️ भारत में झुग्गियों की स्थिति
1. झुग्गी क्या होती है?
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प्रणब सेन समिति (2010): जहाँ 20 या उससे अधिक परिवार बिना शौचालय, साफ पानी, और बुनियादी सुविधाओं के साथ खराब मकानों में रहते हैं।
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UN-Habitat: जहाँ लोगों के पास पक्का मकान, स्वच्छ पानी, पर्याप्त जगह या जमीन के अधिकार नहीं होते।
2. झुग्गी आबादी:
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जनगणना 2011: 17% शहरी आबादी झुग्गियों में रहती है (~1.39 करोड़ परिवार)
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NSSO 2012: 33,510 झुग्गियाँ दर्ज
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बड़े राज्य: महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल
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मुंबई और कोलकाता – विशाल झुग्गी क्षेत्र
3. झुग्गियों का प्रबंधन कौन करता है?
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'भूमि' और 'आवास' राज्य सरकार का विषय है।
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Slum Areas Act, 1956 – केंद्र शासित प्रदेशों में झुग्गियों को सुधारने का कानून।
🏠 झुग्गी विकास की योजनाएँ
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प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY – शहरी):
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गरीबों को पक्के घर देती है।
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दिसंबर 2024 तक 118.64 लाख घर मंजूर; इनमें से 29 लाख झुग्गी निवासियों के लिए।
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AMRUT & Smart Cities Mission:
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झुग्गियों में जल आपूर्ति, सीवरेज, शौचालय आदि सुधारते हैं।
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स्वच्छ भारत मिशन – शहरी 2.0:
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शहरों को स्वच्छ और कचरा मुक्त बनाने पर ज़ोर।
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✅ समाधान – क्या किया जा सकता है?
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स्थान-विशिष्ट योजना बनाएँ:
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भौगोलिक और मिट्टी के आँकड़ों से योजना बनाएँ।
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बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली मजबूत करें।
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बाढ़ क्षेत्रों में निर्माण रोके:
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स्मार्ट सिटी ज़ोनिंग कानून से नियंत्रण हो।
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बाढ़ रोधी इमारतें बनाएँ।
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शहरी ड्रेनेज सुधारें:
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SUDS (Sustainable Urban Drainage Systems) अपनाएँ:
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छिद्रदार फुटपाथ
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वर्षा उद्यान
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हरित क्षेत्र
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झुग्गी उन्नयन:
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PMAY के तहत ऊँचे प्लेटफॉर्म पर घर, बेहतर सीवर और शौचालय।
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तकनीक और डेटा का प्रयोग:
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IMD और NRSC के सैटेलाइट डेटा का उपयोग।
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IFLOWS–Mumbai और CFLOWS–Chennai जैसे टूल्स से बाढ़ की भविष्यवाणी।
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Sponge City Concept:
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शहरों को "स्पंज" की तरह डिज़ाइन करना ताकि बारिश का पानी सोखा जा सके।
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शंघाई ने ग्रीन रूफ और छिद्रदार सड़कें अपनाईं।
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मुंबई भी इस मॉडल पर काम कर रहा है।
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झीलों और जल निकायों का पुनरुद्धार:
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शहरी झीलों को पुनर्जीवित करना – जैसे बेंगलुरु का जक्कूर झील, जो अब बाढ़ से सुरक्षा देती है।
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🧾 निष्कर्ष
सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDG) को 2030 तक पूरा करने के लिए भारत को झुग्गी निवासियों की सुरक्षा पर तेजी से काम करना होगा।
मुख्य लक्ष्य:
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SDG 1: गरीबी हटाओ
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SDG 6: स्वच्छ जल और स्वच्छता
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SDG 11: टिकाऊ शहर और समुदाय
जरूरत है: पक्का घर, बेहतर योजना, और बाढ़ से सुरक्षा
📘 FAQ: बाढ़ क्षेत्रों में झुग्गियाँ
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❓ झुग्गियाँ बाढ़ क्षेत्रों में ही क्यों बसती हैं?
👉 क्योंकि वहाँ ज़मीन सस्ती होती है या अवैध होती है, और गरीब लोग सस्ती जगहों में रहने को मजबूर होते हैं। -
❓ भारत में कितने झुग्गी निवासी बाढ़ क्षेत्रों में रहते हैं?
👉 लगभग 15.8 करोड़ – यह दुनिया में सबसे ज्यादा है। -
❓ कौन-कौन से भारतीय शहरों में बाढ़ प्रभावित झुग्गियाँ हैं?
👉 मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई जैसे शहरों में सबसे ज़्यादा। -
❓ भारत में शहरी बाढ़ के मुख्य कारण क्या हैं?
👉 भारी वर्षा, अवरुद्ध नालियाँ, बाढ़ क्षेत्र में निर्माण, अचानक फ्लैश फ्लड, जलवायु परिवर्तन। -
❓ Sponge City Concept क्या है?
👉 यह एक ऐसा मॉडल है जहाँ शहरों को ऐसे डिज़ाइन किया जाता है कि वे बारिश का पानी सोख सकें।
👉 ग्रीन रूफ, छिद्रदार सड़कें, पार्कों का उपयोग होता है। मुंबई ने भी इसे अपनाया है।
🎓 राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के 5 वर्ष
स्रोत: PIB
📌 क्यों चर्चा में?
हाल ही में केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने अखिल भारतीय शिक्षा समागम (ABSS) 2025 का उद्घाटन किया।
यह आयोजन NEP 2020 की 5वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में हुआ।
📘 क्या है NEP 2020?
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यह भारत की नई शिक्षा नीति है, जो 1986 के बाद 34 वर्षों में पहली बार बनाई गई।
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डॉ. कस्तूरीरंगन समिति की सिफारिशों पर आधारित।
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इसका उद्देश्य:
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शिक्षा को सुलभ, सस्ती, समान, और उच्च गुणवत्ता वाली बनाना।
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21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा प्रणाली बनाना।
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✅ 5 वर्षों में प्रमुख उपलब्धियाँ:
1. 🧒 मातृभाषा और पाठ्यक्रम में सुधार
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पुरानी 10+2 प्रणाली को बदलकर 5+3+3+4 संरचना लागू की गई।
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प्रारंभिक कक्षाओं में मातृभाषा में शिक्षा पर ज़ोर।
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कौशल आधारित और व्यावहारिक शिक्षा को बढ़ावा।
2. 👧 समावेशी शिक्षा
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1.15 लाख से अधिक वंचित वर्गों (SEDGs) के बच्चे और 7.58 लाख लड़कियाँ आवासीय विद्यालयों में शामिल।
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PRASHAST ऐप के ज़रिए दिव्यांग छात्रों की पहचान में मदद।
3. 📖 बुनियादी साक्षरता और गणना क्षमता
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NIPUN भारत और विद्या प्रवेश के ज़रिए 4.2 करोड़ छात्रों को फायदा।
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देशभर के 8.9 लाख स्कूलों में कार्यक्रम लागू।
4. 👩🏫 शिक्षक प्रशिक्षण
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4 लाख से ज़्यादा शिक्षक NISHTHA के तहत प्रशिक्षित।
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प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म: DIKSHA, PM e-VIDYA
5. 🎓 बहु-विषयक और लचीली उच्च शिक्षा
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MERUs (Multidisciplinary Education and Research Universities) की स्थापना।
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ABC (Academic Bank of Credits) के ज़रिए:
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क्रेडिट ट्रांसफर
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लचीली पढ़ाई
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कॉलेज में एंट्री-एग्जिट की सुविधा
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6. 🌐 स्कूलों में डिजिटल सशक्तिकरण
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अब 72% स्कूलों में इंटरनेट कनेक्शन।
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AI टूल्स का उपयोग:
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Katha Sakhi – कहानी सुनाने वाली AI
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Teacher Tara – शिक्षक सहायक AI
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अन्य पहलें:
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Vidyanjali
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ई-जादुई पिटारा
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DIKSHA, PM e-VIDYA
7. 📝 सामान्य प्रवेश परीक्षा (CUET)
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2022 से लागू – सभी कॉलेजों में एक समान प्रवेश प्रक्रिया।
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प्रवेश अब Board अंकों पर निर्भर नहीं बल्कि मेरिट आधारित।
📚 प्रमुख योजनाएँ और पहलें
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PM SHRI Schools – आदर्श विद्यालय
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NIPUN भारत – बुनियादी साक्षरता
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PARAKH – राष्ट्रीय मूल्यांकन निकाय
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NISHTHA – बड़े स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण
⚠️ NEP 2020 को लागू करने में चुनौतियाँ
1. 🚫 केंद्र और राज्यों में सहमति की कमी
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तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल जैसे राज्य:
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3-भाषा नीति,
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CUET,
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मातृभाषा अनिवार्यता का विरोध करते हैं।
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उनका तर्क: यह संघीय ढांचे के खिलाफ है।
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2. 💸 शिक्षा पर कम खर्च
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नीति के अनुसार, GDP का 6% शिक्षा पर खर्च होना चाहिए।
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वर्तमान में यह लक्ष्य पूरा नहीं हो रहा।
3. 🏫 आधारभूत ढांचे की कमी
ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी:
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डिजिटल उपकरणों की कमी
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प्रशिक्षित शिक्षक नहीं
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मजबूत आंगनवाड़ी प्रणाली नहीं
4. 🧑🏫 शिक्षक संबंधी मुद्दे
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राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा पाठ्यक्रम में देरी
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स्थानीय भाषा में प्रशिक्षण की कमी
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स्थानीय शिक्षक भर्ती का अभाव
5. 📉 उच्च शिक्षा में धीमी प्रगति
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HECI (Higher Education Commission of India) जो UGC को बदलेगा – अभी तक पूरी तरह से लागू नहीं।
6. 🔍 निगरानी और कार्यान्वयन में कमज़ोरी
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कई स्कूल-विश्वविद्यालय बदलाव के लिए तैयार नहीं।
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डेटा संग्रहण और क्रियान्वयन कमजोर।
🛠️ अब क्या किया जाना चाहिए?
1. 📊 अनुसंधान और नवाचार में निवेश
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छात्रों की सीखने की प्रक्रिया को लेकर स्थानीय शोध को बढ़ावा देना।
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डेटा आधारित नीति निर्माण।
2. 💻 डिजिटल अंतर खत्म करना
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केवल 57.2% स्कूलों में कंप्यूटर,
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केवल 53.9% में इंटरनेट।
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ग्रामीण स्कूलों में ICT टूल्स पहुँचाना जरूरी।
3. 👨🏫 शिक्षक क्षमता विकास
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डिजिटल टूल्स,
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आलोचनात्मक सोच,
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रचनात्मकता और नैतिक शिक्षा में प्रशिक्षण।
4. 🤝 सहयोग को बढ़ावा
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शिक्षक, नीति निर्माता, और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच बेहतर तालमेल।
🧾 निष्कर्ष
NEP 2020 एक दूरदर्शी नीति है — यह आधुनिक, समावेशी और व्यावहारिक है।
📈 कुछ बड़ी उपलब्धियाँ:
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मजबूत बुनियादी शिक्षा
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डिजिटल सशक्तिकरण
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उच्च शिक्षा में सुधार
⚠️ लेकिन चुनौतियाँ बनी हुई हैं:
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राज्य सरकारों का विरोध
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धन की कमी
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कार्यान्वयन धीमा
👉 अगर सही निवेश, सहयोग, और नवाचार के साथ कार्य किया जाए, तो NEP 2020 भारतीय शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकता है।
📘 FAQ: NEP 2020 के 5 वर्ष
1. ❓ NEP 2020 क्या है?
👉 यह भारत की नई शिक्षा नीति है, जो 2020 में शुरू हुई थी।
👉 यह 1986 की नीति को बदलती है, और सभी स्तरों पर सस्ती, समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखती है।
2. ❓ NEP 2020 के तहत नया स्कूल ढाँचा क्या है?
👉 पुराना 10+2 सिस्टम हटाकर 5+3+3+4 संरचना अपनाई गई:
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5 वर्ष: आधारभूत चरण
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3 वर्ष: तैयारी चरण
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3 वर्ष: मध्य चरण
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4 वर्ष: माध्यमिक चरण
3. ❓ NEP 2020 की मुख्य योजनाएँ कौन-सी हैं?
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PM SHRI स्कूल
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NIPUN भारत
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NISHTHA शिक्षक प्रशिक्षण
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PARAKH मूल्यांकन निकाय
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DIKSHA, e-Jaadui Pitara, PM e-VIDYA
4. ❓ Academic Bank of Credits (ABC) क्या है?
👉 यह एक डिजिटल सिस्टम है जहाँ छात्र क्रेडिट स्टोर और ट्रांसफर कर सकते हैं।
👉 इससे उच्च शिक्षा में लचीले प्रवेश और निकासी विकल्प मिलते हैं।
5. ❓ CUET क्या है और क्यों लाया गया?
👉 Common University Entrance Test
👉 2022 में शुरू किया गया ताकि कॉलेज प्रवेश में एकरूपता और बोर्ड अंकों पर निर्भरता कम हो।
🦁 एशियाई शेर (Asiatic Lion)
स्रोत: NIA
📌 क्या है यह?
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एशियाई शेर केवल भारत में पाया जाने वाला एक दुर्लभ उप-प्रजाति है।
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इसका वैज्ञानिक नाम है: Panthera leo persica
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यह अफ्रीकी शेरों से अलग दिखता है:
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छोटी अयाल (mane)
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कान बाहर से दिखते हैं
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पेट के पास झोल सा हिस्सा होता है (belly fold)
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🌍 यह कहां पाया जाता है?
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मुख्य रूप से: गिर नेशनल पार्क (गुजरात)
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अब यह अमरेली, जूनागढ़, भावनगर और तटीय क्षेत्रों में भी दिखते हैं।
⚠️ संरक्षण स्थिति
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IUCN Red List: Vulnerable (असुरक्षित)
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वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची-I (Schedule-I)
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CITES: परिशिष्ट-I (अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध)
🧾 ऐतिहासिक तथ्य
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पहले ये पूर्वी भारत से लेकर भूमध्यसागर (Mediterranean) तक पाए जाते थे।
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1900 के दशक तक केवल गिर में कुछ ही बचे थे।
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संरक्षण के प्रयासों से संख्या बढ़ी है, लेकिन अभी भी सिर्फ एक ही जंगली आबादी है – जो जोखिमभरा है।
❗ हाल की चिंता
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हाल ही में अमरेली (गुजरात) में तीन शावकों की मौत हो गई।
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6 और शावक निगरानी में हैं – यह बढ़ती शावक मृत्यु दर को लेकर चिंता बढ़ाता है, भले ही कुल संख्या बढ़ रही हो।
🌾 आईसीएआर की एआई-आधारित कृषि मौसम सलाह (Agromet Advisory)
स्रोत: NEWSONAIR
🤖 क्या है यह?
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किसानों के लिए एआई (AI) आधारित सलाह प्रणाली।
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जलवायु-स्मार्ट कृषि निर्णय लेने में मदद करती है।
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ICAR और ICRISAT द्वारा विकसित।
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मानसून मिशन-III का हिस्सा।
📍 अभी कहां लागू हो रहा है?
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महाराष्ट्र में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चल रहा है।
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बाद में पूरे भारत में लागू होगा।
🧠 यह कैसे काम करता है?
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AI और Machine Learning का उपयोग करके स्थानीय मौसम पर आधारित सलाह देता है।
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सलाह इन पर आधारित होती है:
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फसल चक्र
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मिट्टी का डेटा
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स्थान
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किसान की प्रोफाइल
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📱 प्रमुख सुविधाएं
सलाह इन माध्यमों से दी जाती है:
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WhatsApp बॉट (स्थानीय भाषाओं में)
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IVRS (फोन आधारित सेवा)
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मोबाइल ऐप्स
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गांवों में संसाधन केंद्र
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डेटा स्रोत: IMD, सैटेलाइट इमेज, मौसम तकनीक
🌾 क्यों है यह महत्वपूर्ण?
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12 करोड़ से ज्यादा छोटे और सीमांत किसान लाभान्वित होंगे।
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अनिश्चित मौसम से जोखिम घटेगा।
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उत्पादकता और आमदनी में सुधार होगा।
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कृषि तकनीक की अंतिम कड़ी को जोड़ेगा।
🧺 राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC)
स्रोत: TOI
🏛️ क्या है NCDC?
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यह एक वैधानिक निकाय (statutory body) है।
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ग्रामीण और कृषि क्षेत्र की सहकारी संस्थाओं की मदद के लिए बना।
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1963 में संसद के अधिनियम से स्थापित।
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केंद्रीय सहयोग मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
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मुख्यालय: नई दिल्ली
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18 राज्य/क्षेत्रीय कार्यालय देशभर में हैं।
🎯 यह क्या करता है?
ऋण और अनुदान प्रदान करता है इन क्षेत्रों के लिए:
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कृषि
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डेयरी, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन
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ग्रामीण उद्योग (हथकरघा, रेशम उद्योग आदि)
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उत्पादन, भंडारण, प्रसंस्करण, विपणन
🌾 ताजा खबर
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हाल ही में केंद्र सरकार ने ₹2000 करोड़ का अनुदान 4 वर्षों के लिए स्वीकृत किया है।
🤝 क्यों है NCDC महत्वपूर्ण?
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13,000+ सहकारी संस्थाओं को सेवाएं देता है (2.9 करोड़ सदस्य)।
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महिला-नेतृत्व वाली, श्रम-प्रधान सहकारिताओं को बढ़ावा देता है।
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कोल्ड स्टोरेज, पशु स्वास्थ्य, सिंचाई जैसी ढांचागत सुविधाएं तैयार करने में मदद करता है।
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समावेशी ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है।

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