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✅"24 मई 2025 के प्रमुख करंट अफेयर्स | सुप्रीम कोर्ट का उपभोक्ता अदालतों पर फैसला, PM E-DRIVE योजना, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन"

 

🏛️ सुप्रीम कोर्ट ने कहा: उपभोक्ता विवादों को सुलझाने के लिए स्थायी संस्थाएं बनाओ

Source:-BS



📰 खबर में क्यों?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि उपभोक्ता शिकायतों को निपटाने के लिए स्थायी न्याय निकाय (permanent consumer redressal bodies) बनाए जाएं।

SC ने कहा –
✅ उपभोक्ताओं के अधिकार संवैधानिक और जरूरी हैं।
✅ इनकी सुरक्षा के लिए एक मजबूत और स्थायी सिस्टम चाहिए।

अभी उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (CPA) 1986 और 2019 को लागू करने में काफी दिक्कतें हैं।


❓ क्यों चाहिए स्थायी उपभोक्ता विवाद समाधान संस्थाएं?

1. अस्थायी नियुक्तियां = देरी

  • SC ने कहा कि अस्थायी जजों की वजह से निर्णयों में देरी होती है।

  • अगर फुल-टाइम जज हों, तो पेशेवर तरीके से और तेजी से न्याय मिलेगा।

2. बहुत सारे लंबित मामले

  • NCDRC के अनुसार, 2023 में करीब 5.5 लाख मामले पेंडिंग थे।

  • स्टाफ की कमी, खाली पद और कमजोर डिजिटल सिस्टम समस्या बढ़ा रहे हैं।

3. डिजिटल युग = नई समस्याएं

  • 2026 तक भारत का ई-कॉमर्स बाजार $200 बिलियन का होगा।

  • इससे जुड़ी शिकायतें बढ़ रही हैं – जैसे नकली सामान, फ्रॉड, डेटा चोरी।

  • मौजूदा सिस्टम इन नई तकनीकी समस्याओं को नहीं संभाल पा रहा।


📜 संवैधानिक और कानूनी समर्थन

उपभोक्ता अधिकार = मूल अधिकार जैसा

  • उपभोक्ताओं को सही जानकारी, सही दाम और सुरक्षित सेवाएं मिलना चाहिए।

संविधान से समर्थन – DPSPs (राज्य नीति निर्देशक सिद्धांत)

  • अनुच्छेद 37: DPSPs क़ानून नहीं हैं, पर सरकार को इन्हें ध्यान में रखना चाहिए।

  • अनुच्छेद 47: सरकार का काम है कि वह स्वास्थ्य सुधारे और हानिकारक चीज़ें रोके।


⚖️ उपभोक्ताओं को बचाने वाले कानून

1. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986

6 बुनियादी अधिकार दिए:

अधिकारमतलब
सुरक्षा का अधिकारहानिकारक वस्तुओं/सेवाओं से बचाव
जानकारी का अधिकारदाम, गुणवत्ता जैसी सही जानकारी
पसंद का अधिकारकई विकल्पों में चुनने की आज़ादी
सुने जाने का अधिकारशिकायत दर्ज करने का हक़
निवारण का अधिकारसमाधान पाने का हक़
शिक्षा का अधिकारअपने अधिकारों को जानने का हक़

सीमाएं: ऑनलाइन खरीदारी, अनुबंध, प्रोडक्ट जिम्मेदारी को कवर नहीं करता था।

2. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019

  • 1986 वाले कानून को रिप्लेस किया।

  • नई चीज़ें जोड़ीं:

    • ई-कॉमर्स और डिजिटल शिकायतें

    • प्रोडक्ट लायबिलिटी (अगर प्रोडक्ट से नुकसान हो)

    • गलत अनुबंध (one-sided rules)

    • CCPA (केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण) बनाया गया


3. BIS अधिनियम, 2016

  • प्रोडक्ट की गुणवत्ता और सुरक्षा तय करता है

  • खराब उत्पादों को वापस बुलाने की शक्ति देता है


4. लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, 2009

  • दुकान में सही तोल-माप और दाम तय करता है


💡 सरकार की अन्य पहलें

  • Dark Patterns Guidelines 2023 – ऑनलाइन धोखाधड़ी को रोकना

  • Jago Grahak Jago – जागरूकता अभियान

  • E-Jagriti Portal – AI से शिकायत दर्ज करना

  • E-Dakhil Portal – ऑनलाइन शिकायत सुविधा

  • 1915 हेल्पलाइन – 17 भाषाओं में मदद

  • राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस – 24 दिसंबर

  • GRAI Index – मंत्रालयों की रैंकिंग


⚠️ चुनौतियाँ और समाधान

समस्यासमाधान
लोगों को अधिकार नहीं पतास्कूली किताबों में पढ़ाएं, जागरूकता अभियान जारी रखें
शिकायत दर्ज करना मुश्किलप्रक्रिया आसान बनाएं
प्रोडक्ट जिम्मेदारी लागू नहीं होतीअधिकारियों को ट्रेनिंग दें
बहुत सारे अलग प्लेटफॉर्मसबको एक करें, गांवों में सेल बनाएं
टेक्नोलॉजी के एक्सपर्ट नहींतकनीक और क़ानून के एक्सपर्ट रखें
स्टाफ और पैसा कमसरकार स्थायी कोर्ट बनाए और बजट बढ़ाए
कोर्ट धीमीवैकल्पिक समाधान जैसे ADR को बढ़ावा दें (T.K. Viswanathan समिति, 2024)

✅ निष्कर्ष

उपभोक्ता अधिकार सिर्फ क़ानून नहीं हैं, ये सरकार की नैतिक और संवैधानिक ज़िम्मेदारी भी हैं।

आज के डिजिटल युग में, हमें:

  • स्थायी न्याय निकाय

  • ट्रेंड स्टाफ

  • सशक्त डिजिटल सिस्टम

  • और लोगों की जागरूकता

की ज़रूरत है, ताकि उपभोक्ताओं के साथ धोखा ना हो।


🌿 PM E-DRIVE योजना – इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा

Source:-PIB

📰 खबर में क्यों?

भारी उद्योग मंत्रालय ने PM E-DRIVE योजना लॉन्च की है ताकि बड़े शहरों में इलेक्ट्रिक बसों का इस्तेमाल बढ़े।

⚡ योजना क्या है?

पूरा नाम:
PM Electric Drive Revolution in Innovative Vehicle Enhancement

समय सीमा:
अक्टूबर 2024 – मार्च 2026

कुल बजट:
₹10,900 करोड़


🎯 मुख्य उद्देश्य:

  • EVs को बढ़ावा देना

  • पूरे भारत में चार्जिंग स्टेशन बनाना

  • भारत में EV निर्माण को बढ़ावा देना (आत्मनिर्भर भारत के तहत)


🚘 किन्हें मिलेगा फायदा?

  • इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (e-बाइक, स्कूटर)

  • इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (e-रिक्शा)

  • इलेक्ट्रिक बसें (शहरों में)

  • e-एम्बुलेंस और e-ट्रक (स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट वाले)


💰 सब्सिडी

  • मैक्स 15% फैक्ट्री प्राइस या

  • फिक्स्ड अमाउंट प्रति वाहन – जो भी कम हो


🔌 चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर

  • 72,300 फास्ट चार्जर लगाए जाएंगे

  • शहरों और हाइवे दोनों में

डिजिटल ऐप:

  • BHEL एक सुपर ऐप बनाएगा

  • जिससे लोग चार्जर ढूंढ सकें, स्लॉट बुक करें, पेमेंट कर सकें


🧪 टेस्टिंग और क्वालिटी

  • ₹780 करोड़ से टेस्टिंग लैब अपग्रेड की जाएंगी

  • सुरक्षा और नियमों की जांच की जाएगी


✅ पात्रता

  • सिर्फ Advanced Battery EVs को अनुमति

  • सरकारी गाड़ियां इसमें शामिल नहीं

  • वाहन CMVR, 1989 के तहत रजिस्टर्ड हो

  • योजना की अवधि में ही निर्माण और पंजीकरण हो


📈 EV बिक्री में उछाल

2024-25 में 5.7 लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बिके।
EMPS और E-DRIVE जैसी योजनाओं की वजह से तेज़ बढ़ोतरी हुई।


🌍 भारत के पर्यावरणीय लक्ष्य से जुड़ाव

  • भारत का लक्ष्य 2070 तक Net-Zero Carbon बनना है

  • EV योजनाएं – साफ हवा, कम प्रदूषण, ग्रीन शहरों की ओर कदम


💚 ग्रीन हाइड्रोजन – भारत का अगला बड़ा कदम

Source:-PIB

📰 खबर में क्यों?

भारत ने वर्ल्ड हाइड्रोजन समिट 2025 (नीदरलैंड्स) में कहा कि वह ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में दुनिया का लीडर बनना चाहता है।


💧 क्या है ग्रीन हाइड्रोजन?

  • सोलर या विंड पावर से पानी को तोड़कर हाइड्रोजन (H₂) और ऑक्सीजन (O₂) बनाया जाता है।

  • कोई प्रदूषण नहीं, पूरी तरह इको-फ्रेंडली


🚆 कहां इस्तेमाल होता है?

  • Fuel Cell EVs

  • फैक्ट्रियों (फर्टिलाइज़र, स्टील, रिफाइनरी)

  • रेल और रोड ट्रांसपोर्ट


🇮🇳 भारत की पहलें

National Green Hydrogen Mission
लक्ष्य: 2030 तक 5 मिलियन टन/साल उत्पादन
फेज 1: 2022-26
फेज 2: 2026-30

GHCI (Green Hydrogen Certification):
– BEE जांच कर बताएगा कि हाइड्रोजन वाकई ‘ग्रीन’ है

Environmental Clearance हटाई गई:
– समय और कागज़ी झंझट कम होगा

ग्रीन हब:

  • कांडला (गुजरात)

  • पारादीप (ओडिशा)

  • तूतीकोरिन (तमिलनाडु)

Global Tie-ups:
जापान, ऑस्ट्रेलिया, UAE से टेक्नोलॉजी और निवेश


⚛️ हाइड्रोजन क्या है?

  • सबसे हल्का गैस

  • रंगहीन, गंधहीन, जलनशील

  • पर्यावरण के लिए सुरक्षित


🔍 भारत के लिए क्यों ज़रूरी?

  • तेल के आयात पर खर्च घटेगा

  • बायोमास से उत्पादन = किसानों की आमदनी

  • ग्रीन जॉब्स का निर्माण होगा

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