Xenon Gas का Everest पर पहला उपयोग और Autism (ASD) की पूरी जानकारी | UPSC के लिए महत्वपूर्ण सामान्य विज्ञान और सामाजिक मुद्दे"
🧪 ज़ेनॉन गैस – माउंट एवरेस्ट पर पहली बार इस्तेमाल
स्रोत: TOI | पेपर लिंक: GS पेपर 3 – जनरल साइंस, प्रारंभिक तथ्य
📌 क्या हुआ?
चार ब्रिटिश पर्वतारोहियों ने पहली बार माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई ज़ेनॉन गैस का उपयोग करके की।
उन्होंने इस गैस का उपयोग acclimatisation (ऊँचाई पर जल्दी अनुकूलन) के लिए किया, जिससे उनका शरीर तेजी से ऊँचाई के वातावरण में ढल गया।
🌬️ ज़ेनॉन गैस क्या है?
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ज़ेनॉन एक दुर्लभ और निष्क्रिय गैस (noble gas) है। इसे "stranger gas" भी कहते हैं।
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यह रंगहीन, गंधहीन और आमतौर पर रासायनिक रूप से प्रतिक्रिया नहीं करती।
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पृथ्वी के वायुमंडल में बहुत कम मात्रा में पाई जाती है।
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यह ठोस, तरल या गैस किसी भी रूप में हो सकती है।
🏭 ज़ेनॉन गैस कैसे प्राप्त की जाती है?
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हवा को फ्रैक्शनल डिस्टिलेशन (विभाजित आसवन) द्वारा नाइट्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है।
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इस प्रक्रिया के दौरान ज़ेनॉन एक उप-उत्पाद (byproduct) के रूप में निकलती है।
🧬 क्या यह पूरी तरह निष्क्रिय है?
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ज़ेनॉन आमतौर पर प्रतिक्रिया नहीं करती, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में यह फ्लोरीन और ऑक्सीजन के साथ यौगिक बना सकती है।
🧗♂️ ज़ेनॉन गैस के उपयोग:
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पर्वतारोहण में:
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शरीर में ऑक्सीजन सप्लाई को बढ़ाता है।
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जल्दी अनुकूलन में मदद करता है।
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ऊँचाई की बीमारी और ऑक्सीजन की कमी से बचाता है।
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चिकित्सा क्षेत्र में:
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एक प्राकृतिक एनेस्थेटिक (दर्द निवारक) के रूप में।
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लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ाता है।
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दिल, दिमाग और फेफड़ों की इमेजिंग में उपयोगी।
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लाइटिंग में:
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फ्लैशलाइट, स्टोर्ब लाइट और कार हेडलाइट में।
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सफेद, चमकदार रोशनी देता है।
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उद्योग में:
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न्यूक्लियर प्लांट्स, टीवी/रेडियो ट्यूब्स में।
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माइक्रोचिप को Etch करने में ज़ेनॉन डाइफ्लोराइड का उपयोग।
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अंतरिक्ष मिशन में:
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सैटेलाइट्स और स्पेस मिशनों में आयन इंजन का ईंधन।
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☠️ ज़हर या खतरा?
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शुद्ध ज़ेनॉन सुरक्षित है।
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लेकिन इसके यौगिक जैसे ज़ेनॉन डाइफ्लोराइड विषैले और विस्फोटक होते हैं।
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यह प्रयोगशालाओं और उद्योगों में मजबूत ऑक्सीकरण एजेंट की तरह कार्य करते हैं।
🧠 याद रखने की ट्रिक:
"Xenon = अजनबी गैस + चमकीली रोशनी + एवरेस्ट का ईंधन"
🧩 ऑटिज़्म (Autism Spectrum Disorder - ASD)
स्रोत: The Hindu | पेपर लिंक: GS पेपर 2 – विकलांगता मुद्दे, स्वास्थ्य
📌 ऑटिज़्म क्या है?
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यह मस्तिष्क के विकास से जुड़ी स्थिति है।
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इससे व्यक्ति के बोलने, समझने और व्यवहार करने का तरीका प्रभावित होता है।
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इसे Autism Spectrum Disorder कहा जाता है क्योंकि लक्षण व्यक्ति से व्यक्ति में अलग होते हैं – कुछ हल्के, कुछ गंभीर।
🌍 कितना आम है?
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हर 100 में से लगभग 1 बच्चा ऑटिज़्म से प्रभावित है।
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भारत जैसे देशों में जागरूकता की कमी के कारण कई मामले रिपोर्ट नहीं होते।
⚠️ ऑटिज़्म के साथ अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं:
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मिर्गी (Epilepsy)
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चिंता और डिप्रेशन
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नींद की समस्या
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खुद को चोट पहुँचाने का व्यवहार
🧠 मानसिक क्षमता?
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हर व्यक्ति अलग होता है।
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कुछ को गहरी सीखने की कठिनाई होती है, जबकि कुछ बहुत बुद्धिमान होते हैं।
🧬 कारण क्या हैं?
कोई एक कारण नहीं – जेनेटिक + पर्यावरणीय कारण मिलकर असर डालते हैं:
जेनेटिक कारण:
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परिवार में ऑटिज़्म का इतिहास
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माता-पिता की उम्र ज्यादा होना
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डाउन सिंड्रोम जैसी अन्य बीमारियाँ
पर्यावरणीय कारण:
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गर्भावस्था में प्रदूषण
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समय से पहले जन्म
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कुछ रसायनों का असर
❌ मिथक: टीकों (Vaccines) से ऑटिज़्म नहीं होता।
💊 क्या इलाज संभव है?
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पूरी तरह से ठीक नहीं होता, लेकिन जल्दी इलाज बहुत मददगार होता है।
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स्पेशल एजुकेशन, थेरेपी और पारिवारिक सहयोग से जीवन की गुणवत्ता बेहतर होती है।
🇮🇳 भारत में ऑटिज़्म के लिए प्रयास:
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नेशनल ट्रस्ट एक्ट (1999)
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ऑटिज़्म और अन्य विकलांगों के लिए कानूनी और सामाजिक समर्थन।
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DISHA योजना
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10 साल से कम उम्र के बच्चों को शुरुआती ट्रेनिंग और स्कूल की तैयारी।
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Sahyogi योजना
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सहायक कर्मचारियों को ट्रेनिंग देकर विकलांगों की देखभाल के लिए तैयार करना।
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