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✅ 20 मई 2025 करेंट अफेयर्स विशेष: जनजातीय पहचान से लेकर ग्लेशियर पिघलने तक की ज़रूरी खबरे

गवर्नेंस (Governance)
🇮🇳 भारत में लैंगिक कुपोषण (Gendered Malnutrition in India)
स्रोत: द हिंदू (TH)


📌 UPSC प्रीलिम्स के लिए: POSHAN अभियान, NFHS, एनीमिया, ICDS
📌 UPSC मेन्स के लिए: महिला एवं बाल पोषण, स्वास्थ्य में लैंगिक असमानता


📰 खबर में क्यों?

भारत में 800 मिलियन लोगों को मुफ्त अनाज देने वाला दुनिया का सबसे बड़ा कार्यक्रम चल रहा है, फिर भी कुपोषण और भूख बहुत बड़ी समस्या है — खासकर महिलाओं और लड़कियों में।

POSHAN अभियान जैसे बड़े प्रोग्राम शुरू किए गए, लेकिन पुरुषों और महिलाओं के पोषण में आज भी बड़ा अंतर दिखता है।


🚺 क्या है लैंगिक कुपोषण?

ऐसा कुपोषण जो महिलाओं और लड़कियों को ज्यादा प्रभावित करता है — सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक कारणों से।


🔍 भारत में लैंगिक कुपोषण के मुख्य कारण

1. महिलाओं में ज्यादा एनीमिया और कम वजन

  • NFHS-5 के अनुसार:

    • 15–49 वर्ष की 57% महिलाएं एनीमिक हैं 😔

    • पुरुषों में सिर्फ 26%

  • हर 5 में से 1 महिला अंडरवेट है।

  • महिलाओं को मासिक धर्म, गर्भावस्था, और स्तनपान जैसी अवस्थाओं में ज्यादा पोषण चाहिए। अगर उन्हें पर्याप्त पोषण नहीं मिलता, तो वे और उनका बच्चा दोनों कमजोर हो जाते हैं।


2. शिक्षा की कमी = जागरूकता की कमी

  • महिला साक्षरता दर (Census 2011): 64.6%

  • पुरुष साक्षरता: 80.9%

  • कम पढ़ी-लिखी महिलाएं पोषण, आयरन टैबलेट्स, हेल्थ स्कीम्स के बारे में नहीं जानतीं।


3. घर में भोजन का असमान बंटवारा

  • गरीब घरों में महिलाएं अक्सर सबसे बाद में और कम खाती हैं

  • कई बार, अच्छा खाना पुरुषों को दिया जाता है।

  • यह सिर्फ पोषण की नहीं, सामाजिक न्याय की समस्या भी है।


4. आर्थिक आज़ादी की कमी

  • करीब 49% महिलाएं अपने पैसे का फैसला नहीं ले सकतीं।

  • महिलाएं 53% कम कमाती हैं पुरुषों से।

  • अगर पैसा नहीं संभाल सकतीं, तो पौष्टिक खाना नहीं खरीद पातीं।


5. सरकारी योजनाओं में कमियाँ

  • 2022-23 में भारत ने ₹24,000 करोड़ खर्च किए पोषण योजनाओं पर।
    लेकिन सिर्फ 69% पैसे ही खर्च हो पाए। 😞

  • POSHAN अभियान ने जागरूकता बढ़ाई, लेकिन ग्राउंड पर एनीमिया और कुपोषण कम नहीं हुआ।

  • POSHAN 2.0 को महिला सशक्तिकरण योजनाओं से अच्छे से नहीं जोड़ा गया।


🏥 क्या है POSHAN अभियान?

शुरुआत: 2018
उद्देश्य:

  • 0–6 साल के बच्चे

  • किशोरी लड़कियाँ

  • गर्भवती महिलाएं

  • स्तनपान कराने वाली माताएं

🎯 हर साल के लक्ष्य:

  • स्टंटिंग 2% घटाना

  • कुपोषण 2% घटाना

  • एनीमिया 3% घटाना

  • कम जन्म वजन 2% घटाना

🔑 मुख्य स्तंभ (Pillars):

  • ICDS, NHM, PMMVY के ज़रिए सेवा देना

  • मंत्रालयों के बीच तालमेल

  • POSHAN ट्रैकर ऐप से निगरानी

  • जन आंदोलन

  • पोषण वाटिका (Nutri-Gardens)


🔄 POSHAN 2.0 (2021 से)

जिन योजनाओं को मिलाया गया:

  • आंगनवाड़ी सेवाएं

  • पूरक पोषण कार्यक्रम

  • किशोरी लड़कियों की योजना

  • नेशनल क्रेच योजना

  • POSHAN अभियान

✅ अब किसका हिस्सा:

  • मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और POSHAN 2.0

💰 फंडिंग प्रकार:

  • Centrally Sponsored Scheme

  • केंद्र-राज्य खर्च का अनुपात: 60:40

📈 हाल की पहुँच:

  • 8.9 करोड़ बच्चे (0-6 वर्ष)

  • 69.42 लाख गर्भवती महिलाएं

  • 42.54 लाख स्तनपान कराने वाली माताएं


✅ क्या किया जा सकता है? (उपाय)

1. महिलाओं को आर्थिक ताकत देना

  • Esther Duflo के रिसर्च के अनुसार, जब महिलाएं पैसा संभालती हैं, तो वे बच्चों और पोषण पर ज्यादा खर्च करती हैं।

  • महिलाओं को ट्रेनिंग, लोन और स्कीम्स की जानकारी देना ज़रूरी है।


2. पोषण को रोजगार से जोड़ना
POSHAN 2.0 को इन योजनाओं से जोड़ना चाहिए:

  • Skill India

  • पीएम मुद्रा योजना

  • दीनदयाल अंत्योदय योजना

  • हेल्थ वर्कर्स को चाहिए कि वे महिलाओं को जनधन, स्टैंड अप इंडिया जैसी योजनाओं से जोड़ें।


3. आंगनवाड़ी केंद्रों का स्मार्ट इस्तेमाल
उन्हें मल्टीपर्पज़ सेंटर बनाएं:

  • पोषण

  • हेल्थ सलाह

  • स्किल ट्रेनिंग

  • फाइनेंशियल प्लानिंग

  • सरकारी योजनाओं की जानकारी


4. सही माप और निगरानी

  • एनीमिया घटाने, महिलाओं की कमाई बढ़ाने और फैसले लेने की ताकत बढ़ाने जैसे स्पष्ट लक्ष्य तय करें

  • पैसों के पारदर्शी ऑडिट जरूरी हैं।


5. सामाजिक सोच में बदलाव

  • कम्युनिटी कैंपेन चलाएं:

    • गर्भवती महिलाओं को ज्यादा खाना चाहिए

    • लड़कियाँ सबसे बाद में न खाएं

    • "महिला का स्वास्थ्य = अगली पीढ़ी का स्वास्थ्य"


✍️ निष्कर्ष (मानव शैली में):

सिर्फ खाना देने से कुपोषण दूर नहीं होगा।
महिलाओं को शिक्षा, नौकरी, पैसा और घर में सम्मान चाहिए।

जब महिला मजबूत होगी, तभी परिवार और देश स्वस्थ होंगे।
भारत को सिर्फ पेट नहीं, सोच भी बदलनी है — वरना POSHAN अभियान सिर्फ कागज़ों तक ही रहेगा।


🌾 वैश्विक खाद्य संकट रिपोर्ट 2025 – UPSC छात्रों के लिए आसान हिंदी में
स्रोत: DTE


🌍 क्यों चर्चा में है?

Global Report on Food Crises (GRFC) 2025 के अनुसार,
2024 में 53 देशों में 29.5 करोड़ लोग तीव्र भूख (acute hunger) से जूझ रहे थे।

यह संख्या 2023 से 1.37 करोड़ ज्यादा है। 😟

भूख की यह स्थिति युद्ध, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक संकट और लोगों के विस्थापन के कारण और भी खराब हो गई है।


🧾 GRFC क्या है?

Global Report on Food Crises (GRFC) हर साल प्रकाशित की जाती है:

  • Global Network Against Food Crises (GNAFC) द्वारा

  • सहयोग में: Food Security Information Network (FSIN)

यह रिपोर्ट बताती है:

  • तीव्र खाद्य असुरक्षा (acute food insecurity) की स्थिति

  • बच्चों में कुपोषण (6–59 महीने की उम्र के)

यह सरकारों और एजेंसियों को बताती है कि कहां मदद सबसे ज्यादा जरूरी है।


🔍 तीव्र खाद्य असुरक्षा (Acute Food Insecurity) क्या होती है?

जब लोगों को अचानक इतना खाना नहीं मिलता कि वो स्वस्थ रह सकें या आजीविका चला सकें, तो उसे acute food insecurity कहते हैं।

कारण हो सकते हैं:

  • युद्ध या हिंसा

  • जलवायु आपदा (बाढ़, सूखा)

  • रोजगार या आय की हानि

  • खराब स्वास्थ्य सेवाएं


💣 GRFC 2025 में बताई गई मुख्य वजहें

1. 🪖 संघर्ष और विस्थापन (Conflict & Displacement)

  • 20 देशों में संघर्ष ही भूख का सबसे बड़ा कारण है

  • लगभग 14 करोड़ लोग प्रभावित

  • सबसे बुरी हालत: नाइजीरिया, सूडान, म्यांमार, गाजा

युद्ध से खेती नष्ट होती है, बाजार बंद हो जाते हैं, लोग घर छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।


2. 🌧️ जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएं

  • El Nino, बाढ़, गर्मी से फसलें बर्बाद हुईं

  • 18 देशों में लगभग 9.6 करोड़ लोग प्रभावित

  • लगभग 9.5 करोड़ लोग विस्थापित हुए, जिनमें से 75% अपने ही देश में हैं


3. 💸 आर्थिक झटके (Economic Shocks)

  • 15 देशों में आर्थिक संकट से खाने की कीमतें बढ़ीं

  • 5.94 करोड़ लोग प्रभावित
    कारण:

    • नौकरियां गईं

    • आय घटी

    • महंगाई बढ़ी


4. 🚫 फंडिंग में कटौती

  • 2025 में USAID ने फूड प्रोग्राम्स की फंडिंग रोक दी

  • असर पड़ा: अफगानिस्तान, इथियोपिया, हैती आदि पर

  • 1.4 करोड़ बच्चे अब गंभीर कुपोषण या मौत के खतरे में


5. 🏚️ कमजोर शासन (Weak Governance)

  • कमजोर सरकारें स्वास्थ्य, खाद्य व्यवस्था नहीं चला पा रहीं

  • डेटा और निगरानी की भी कमी


🔎 सामाजिक और आर्थिक असर

1. 🧺 गरीबी और बढ़ी

  • किसान सबसे ज्यादा प्रभावित

  • खाने की कीमतों से महंगाई

  • गरीब परिवारों को पौष्टिक खाना नहीं मिल पा रहा


2. 🧒 मानव संसाधन का नुकसान

  • 73.5 करोड़ लोग लगातार कुपोषित

  • 5 साल से छोटे बच्चों की 45% मौतें कुपोषण से

  • गर्भवती महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित


3. 😠 सामाजिक अस्थिरता

  • भूख से लोग गुस्से में आ जाते हैं, विरोध करते हैं

  • जीवित रहने के लिए पलायन शुरू

  • 23.5 मिलियन लोग जलवायु के कारण विस्थापित


4. 🚺 लैंगिक असमानता

  • दुनिया की भूखी आबादी का 60% महिलाएं और लड़कियां

  • खाने की कमी में महिलाएं कम खाती हैं

  • उन्हें जमीन, पैसे, सहायता कम मिलती है


5. 🎒 शिक्षा में गिरावट

  • भूख या काम करने के कारण बच्चे स्कूल छोड़ते हैं

  • 2021 के बाद से 6 मिलियन बच्चे स्कूल से बाहर


✅ समाधान क्या हो सकते हैं?

1. 🛰️ अर्ली वॉर्निंग सिस्टम

  • डेटा से पहले ही भूख की पहचान करें

  • सोमालिया में 2022-23 में ऐसे ही अकाल टला


2. 🌱 खाद्य सुरक्षा प्रणाली बनाना

  • खेती और जीविका का डेटा इकट्ठा करें

  • जरूरत के हिसाब से सही मदद भेजें

  • कृषि आपातकालीन फंड बढ़ाएं (अभी सिर्फ 3%)


3. 🌾 जलवायु-लचीली खेती

  • Climate-smart खेती अपनाएं

  • आपदा में भी खाद्य सप्लाई चालू रखें

  • किसानों और लोकल मार्केट्स को सपोर्ट करें


4. 🚜 कृषि-खाद्य प्रणाली में सुधार

  • लोकल खेती में निवेश

  • खाने में विविधता और पोषण बढ़ाना

  • पोषण केंद्र बनाएं बच्चों और महिलाओं के लिए


🧠 निष्कर्ष:

GRFC 2025 रिपोर्ट बताती है कि भूख का संकट तेजी से बढ़ रहा है —
युद्ध, जलवायु संकट और आर्थिक झटकों के कारण।

29.5 करोड़ लोग भूखे हैं, और मदद की कटौती से हालत और बिगड़ रही है।

अब ज़रूरत है तुरंत कदम उठाने की:

  • खेती को जलवायु-फ्रेंडली बनाएं

  • पोषण प्रोग्राम बढ़ाएं

  • गरीब देशों को फंड और सहायता दें

भूख सिर्फ भोजन की कमी नहीं है… यह सिस्टम, अर्थव्यवस्था और संवेदनशीलता की असफलता है। 🌎🌾💔



भारतीय संविधान 📘
🏛️ अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति संदर्भ
स्रोत: द हिंदू (TH)


📰 खबर में क्यों है?

राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 143 का इस्तेमाल करते हुए सुप्रीम कोर्ट (SC) से 14 बड़े संवैधानिक सवालों पर कानूनी सलाह मांगी है।

यह मामला State of Tamil Nadu v Governor (2023) के फैसले के बाद आया, जिसमें SC ने अनुच्छेद 142 का उपयोग करते हुए राज्यपालों और राष्ट्रपति को राज्य विधेयकों पर समय-सीमा में निर्णय देने को कहा।

ये सवाल खासतौर पर अनुच्छेद 200 और 201 से जुड़े हैं, जो राज्यपाल द्वारा विधेयकों को संभालने की प्रक्रिया पर आधारित हैं।


🧾 अनुच्छेद 143 क्या है?

1. राष्ट्रपति की सलाहकार शक्ति

अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति, किसी महत्वपूर्ण कानूनी या संवैधानिक मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह मांग सकते हैं।
इसे "Advisory Jurisdiction" कहा जाता है।

2. किस प्रकार के सवाल पूछे जाते हैं?

  • अनुच्छेद 143(1): कोई भी कानूनी या तथ्यात्मक प्रश्न जो जनता के लिए महत्वपूर्ण हो – SC चाहे तो सलाह दे सकता है या मना कर सकता है।
    🧠 उदाहरण: 1993 में राम जन्मभूमि केस में SC ने राय देने से मना कर दिया था।

  • अनुच्छेद 143(2): संविधान से पहले के समझौतों से जुड़े मामलों में – SC को अनिवार्य रूप से सलाह देनी होती है।

3. क्या यह सलाह बाध्यकारी है?

नहीं, SC की सलाह बाध्यकारी नहीं होती, लेकिन सरकार को कानून की बेहतर समझ मिलती है।


📌 इस प्रावधान की पृष्ठभूमि क्या है?

4. ऐतिहासिक स्रोत

यह विचार Government of India Act, 1935 से लिया गया है, जिसमें गवर्नर जनरल के पास ऐसी सलाह मांगने का अधिकार था।

  • कनाडा में भी ऐसा ही सिस्टम है।

  • अमेरिका में नहीं है क्योंकि वहां शक्ति का स्पष्ट पृथक्करण (Separation of Powers) है।


🔎 वर्तमान राष्ट्रपति संदर्भ के प्रमुख तथ्य

5. किसने संदर्भ भेजा?

राष्ट्रपति ने यह संदर्भ मंत्रिपरिषद की सलाह पर सुप्रीम कोर्ट को भेजा।

6. कौन सुनेगा यह केस?

अनुच्छेद 145(3) के तहत संविधान पीठ (कम से कम 5 जजों की पीठ) इसकी सुनवाई करेगी।

7. असली मुद्दा क्या है?

  • क्या सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति और राज्यपालों को राज्य विधेयकों पर निर्णय देने के लिए समय सीमा बाँध सकता है, जबकि संविधान में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है (अनुच्छेद 200 और 201)?

  • क्या SC का अनुच्छेद 142 के तहत “पूर्ण न्याय” का उपयोग बहुत आगे जा रहा है?


⚖️ कुछ पुराने राष्ट्रपति संदर्भ (Prelims के लिए ज़रूरी)

8. प्रमुख मामले:

  • Delhi Laws Act (1951): Delegated legislation की सीमा बताई।

  • Kerala Education Bill (1958): मौलिक अधिकार और नीति निदेशक तत्वों में संतुलन।

  • Berubari Case (1960): भूमि हस्तांतरण के लिए संविधान संशोधन ज़रूरी बताया।

  • Keshav Singh Case (1965): विधायी विशेषाधिकारों की व्याख्या।

  • Presidential Poll Case (1974): विधानसभा खाली हो तब भी राष्ट्रपति चुनाव हो सकता है।

  • Third Judges Case (1998): Collegium सिस्टम का निर्माण।


💡 अनुच्छेद 143 क्यों महत्वपूर्ण है?

9. संवैधानिक भूमिकाओं को स्पष्ट करता है

राष्ट्रपति और राज्यपाल की असली भूमिका और अधिकारों की व्याख्या करता है।

10. न्यायपालिका और कार्यपालिका में संतुलन

सरकार और कोर्ट के बीच टकराव को कम कर सकता है – लोकतंत्र में संतुलन बनाए रखने में सहायक।

11. केंद्र-राज्य संबंधों में सहयोग

संवैधानिक स्पष्टता देकर संघीय ढांचे में तालमेल बढ़ाता है।


⚠️ राष्ट्रपति संदर्भ प्रणाली की चुनौतियाँ

12. बाध्यकारी नहीं

SC की राय सिर्फ एक सलाह होती है, अंतिम निर्णय नहीं।

13. राजनीतिक दुरुपयोग का खतरा

सरकार कभी-कभी इस प्रावधान का राजनीतिक लाभ लेने के लिए दुरुपयोग कर सकती है।

14. 'Public Importance' की परिभाषा स्पष्ट नहीं

कौन-सा मामला “जनहित” का है – इसकी कोई ठोस परिभाषा संविधान में नहीं है।

15. SC के लिए समयसीमा नहीं

SC के लिए कोई टाइम लिमिट नहीं है, जिससे कभी-कभी जरूरी मामलों में भी देरी हो सकती है।


🧠 बोनस ज्ञान – होशियार छात्रों के लिए

16. क्या अनुच्छेद 143 का उपयोग SC के फैसले को पलटने के लिए किया जा सकता है?

नहीं, 1991 के कावेरी जल विवाद केस में SC ने कहा कि राष्ट्रपति सलाह से किसी फ़ैसले को बदला नहीं जा सकता।

हां, सरकार Review या Curative Petition दायर कर सकती है।


🧾 निष्कर्ष 

अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति का यह कदम सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि हमारे संविधान की असली आत्मा को लेकर है।
ये सवाल पूछ रहे हैं – कौन कब काम करेगा, कितना अधिकार है, और सिस्टम कैसे ठीक से चले?
यह लोकतंत्र को संतुलित, स्पष्ट और मज़बूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।




🛍️ GeM का 8वां स्थापना दिवस (सरकारी ई-मार्केटप्लेस)

स्रोत: PIB

📅 क्यों चर्चा में है?
GeM ने अपनी स्थापना के 8 साल पूरे कर लिए हैं (17 मई 2017 को रजिस्ट्रेशन हुआ था)। यह दिखाता है कि डिजिटल टूल्स से भारत में पारदर्शिता और निष्पक्षता कैसे बढ़ रही है।

🔍 GeM क्या है?

  • यह एक वेबसाइट/प्लेटफ़ॉर्म है जहाँ सरकार और सरकारी कंपनियाँ (PSUs) ऑनलाइन सामान और सेवाएं खरीदती हैं।

  • शुरुआत: 9 अगस्त 2016 को, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा।

  • उद्देश्य: सरकारी खरीद को आसान, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाना।

  • लाभ: वर्ल्ड बैंक के अनुसार GeM ने सरकार को 10% तक लागत बचत कराई।

  • फीस-रहित लेनदेन: 97% से ज़्यादा डील बिना किसी फीस के होती हैं।

  • उपयोगकर्ता: केंद्र, राज्य सरकारें, PSUs, आदि।

  • उत्पाद और सेवाएं: 10,000+ उत्पाद, 330+ सेवाएं उपलब्ध।

📜 जरूरी नियम

  • General Financial Rules 2017 के अनुसार, सरकारी खरीद के लिए GeM का उपयोग ज़रूरी है।

  • Ownership: यह सरकार के स्वामित्व वाली नॉन-प्रॉफिट कंपनी है।

🌈 समावेशिता (Inclusivity)
GeM छोटे कारोबारों और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देता है:

  • 10 लाख से ज़्यादा MSEs

  • 1.84 लाख महिला उद्यमी

  • 1.3 लाख कारीगर और बुनकर

  • 31,000+ स्टार्टअप्स

📲 नई तकनीक

  • GeM AI: भारत का पहला सरकारी AI चैटबॉट।

  • 10 भारतीय भाषाओं में सपोर्ट + वॉइस और टेक्स्ट दोनों में सहायता।

🎯 सारांश: GeM सरकारी क्षेत्र का अपना "Amazon" है — पारदर्शिता, बचत और लोकल सप्लायर्स को बढ़ावा देने वाला प्लेटफ़ॉर्म।


⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने Ex-Post Facto Environmental Clearance को असंवैधानिक ठहराया

स्रोत: Indian Express

📅 क्यों चर्चा में है?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पर्यावरणीय मंजूरी (Environmental Clearance - EC) किसी प्रोजेक्ट की शुरुआत से पहले लेनी ज़रूरी है। बाद में मंजूरी लेना अवैध है।

📌 Ex-Post Facto EC क्या है?

  • इसका मतलब है प्रोजेक्ट शुरू करने के बाद पर्यावरणीय अनुमति लेना।

  • SC ने पर्यावरण मंत्रालय के 2021 और 2017 के नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया।

📖 संविधान के उल्लंघन

  • अनुच्छेद 21 – जीवन का अधिकार

  • अनुच्छेद 14 – कानून के सामने समानता

⚠️ क्या समस्या थी?

  • कई प्रोजेक्ट्स जानबूझकर बिना अनुमति शुरू किए जाते थे।

  • SC ने कहा – “विकास ज़रूरी है, लेकिन पर्यावरण की कीमत पर नहीं।”

📌 EIA 2006 नियम

  • हर बड़े प्रोजेक्ट को पहले EC लेना ज़रूरी है।

🌿 अनुच्छेद 51A(g) – नागरिकों और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है कि वे पर्यावरण की रक्षा करें।

📢 निष्कर्ष
अब कोई शॉर्टकट नहीं चलेगा। पहले पर्यावरण मंजूरी, फिर काम।


🕊️ भारत की UN शांति मिशनों में प्रतिबद्धता

स्रोत: The Hindu

📅 क्यों चर्चा में है?
UN Peacekeeping Ministerial Meet 2025 (बर्लिन) में भारत ने वैश्विक शांति के लिए नए योगदान की घोषणा की।

🇮🇳 भारत का योगदान

  • Quick Reaction Force (QRF)

  • एक पुरुष पुलिस यूनिट (संभावित रूप से CRPF)

  • महिलाओं द्वारा संचालित पुलिस यूनिट

📊 वर्तमान स्थिति

  • भारत UN शांति सैनिकों का 4वां सबसे बड़ा योगदानकर्ता है।

  • कुल 5,375 सैनिक भेजे गए हैं।

  • नेपाल, रवांडा, बांग्लादेश आगे हैं।

🕊️ बलिदान में सबसे आगे

  • भारत के 180 से ज़्यादा शांति सैनिकों ने अपनी जान गंवाई है।

  • 2007 में लाइबेरिया में भारत ने पहला ऑल-वूमन यूनिट भेजा – ऐतिहासिक उपलब्धि।

🌍 UN Peacekeeping क्या है?

  • पहला मिशन: 1948 – UNTSO (इज़राइल-अरब संघर्ष के लिए)

  • क्यों कहते हैं "Blue Helmets"? – क्योंकि ये नीले रंग की टोपियाँ पहनते हैं, जो शांति का प्रतीक है।

📌 वर्तमान में

  • 61,000+ सैनिक, 7,000 नागरिक

  • 119 देशों के लोग

  • 11 सक्रिय मिशन

💡 निष्कर्ष
भारत सिर्फ सैनिक नहीं भेजता, शांति की लीडरशिप भी करता है। महिलाओं की भागीदारी और कुर्बानी, दोनों में भारत सबसे आगे है।


👩‍🦱 ओडिशा की कंधा जनजाति – खत्म होती टैटू परंपरा

स्रोत: The Hindu

📌 क्यों चर्चा में है?
ओडिशा की कंधा महिलाओं के चेहरे पर बनने वाले पारंपरिक टैटू अब धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। ये टैटू सिर्फ सजावट नहीं थे, बल्कि संघर्ष, दर्द और पहचान की कहानी थे।

🧬 टैटू की कहानी क्या है?

  • पहले लड़कियाँ 10 साल की उम्र में ज्यामितीय डिज़ाइन वाले टैटू बनवाती थीं।

  • यह फैशन नहीं था, बल्कि एक सुरक्षा का तरीका था – ज़मींदारों और ब्रिटिश शोषण से बचने के लिए।

  • आज की पीढ़ी इस दर्दनाक परंपरा को नहीं अपनाती, लेकिन उसका सम्मान करती है


👣 कंधा जनजाति के बारे में:

  • ओडिशा की सबसे बड़ी जनजाति – राज्य की 17.13% जनजातीय आबादी कंधा है।

  • ये लोग 'कुई लोग' या 'कुइंगा' कहलाते हैं।

  • इनकी भाषा – कुई और कुभी, जो द्रविड़ भाषाएँ हैं।

  • इनकी पारिवारिक संरचना – ज़्यादातर न्यूक्लियर फैमिली (एकल परिवार) होती है।

📍 स्थान:
कंधमाल, रायगड़ा, कोरापुट, कालाहांडी जिलों में मुख्य रूप से रहते हैं।


🌿 दो विशेष समूह – PVTG (Particularly Vulnerable Tribal Groups):

  1. डोंगरिया कंधा

    • नियामगिरी की पहाड़ियों में खनन का विरोध करने के लिए प्रसिद्ध।

  2. कुटिया कंधा

    • इनके घर अक्सर सड़क से नीचे स्तर पर होते हैं।

📊 भारत में कुल 75 PVTGs हैं।
ओडिशा में सबसे ज़्यादा – 13 PVTGs

🔚 निष्कर्ष:
टैटू भले ही अब कम हो रहे हैं, लेकिन कंधा जनजाति की संस्कृति और आत्मसम्मान अब भी जीवित है।


❄️ नेपाल का याला ग्लेशियर "मृत" घोषित

स्रोत: Down To Earth

📌 क्यों चर्चा में है?
नेपाल में स्थित याला ग्लेशियर को अब "मृत" घोषित कर दिया गया है – यह जलवायु परिवर्तन का सीधा संकेत है।


❄️ मृत ग्लेशियर क्या होता है?

  • जब कोई ग्लेशियर अब बहता या हिलता नहीं है, तो उसे "मृत" माना जाता है।

  • याला ग्लेशियर 1970 से अब तक 66% सिकुड़ चुका है

  • वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह 2040 तक पूरी तरह गायब हो सकता है।

🪦 इसे एशिया की पहली "क्लाइमेट मेमोरियल पट्टिका" दी गई है – तिब्बती, नेपाली और अंग्रेज़ी में लिखी गई।


📍 याला ग्लेशियर और हिंदू कुश हिमालय (HKH) क्षेत्र

  • स्थान: लांगटांग वैली, नेपाल

  • क्षेत्र: हिंदू कुश हिमालय (HKH)

  • यह नेपाल के सगरमाथा संवाद 2025 और UN ग्लेशियर संरक्षण वर्ष का हिस्सा है।


🌊 वैश्विक ग्लेशियर – डरावने तथ्य

  • दुनिया के अधिकतर ग्लेशियर पाए जाते हैं:

    • अंटार्कटिका (91%)

    • ग्रीनलैंड (8%)

  • 2000–2023 के बीच ग्लेशियरों ने 6,542 अरब टन बर्फ खोई

  • इससे समुद्र स्तर में 18 मिमी वृद्धि हुई।

  • हर मिमी वृद्धि से 2–3 लाख लोग बाढ़ के खतरे में आ जाते हैं।

  • ग्लेशियर पिघलना – समुद्र स्तर बढ़ने का दूसरा सबसे बड़ा कारण है (पहला: समुद्र का गर्म होना)।


🌍 निष्कर्ष:
ग्लेशियर केवल बर्फ नहीं, जीवन के स्रोत हैं। अगर ये पिघलते हैं, तो करोड़ों लोगों का जीवन खतरे में पड़ सकता है।




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