Header Ads

🏛️ वित्तीय संघवाद और 🇮🇳 विकसित भारत 2047 की ओर भारत की यात्रा – केंद्र 🆚 राज्य में संतुलन कैसे बने?

 

🏛️ वित्तीय संघवाद और विकसित भारत 2047 की ओर भारत की यात्रा

(Business Standard संपादकीय – 19 मई 2025 पर आधारित)





🌟 यह लेख क्या बताता है?

यह लेख बताता है कि भारत के राज्यों को 7 विकास स्तंभों और 50 सूचकों के आधार पर रैंक किया जा रहा है ताकि सतत विकास को बढ़ावा दिया जा सके और प्रतियोगी संघवाद को मजबूत किया जा सके — जो भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के मिशन का हिस्सा है।


📘 प्रारंभिक परीक्षा फोकस – महत्वपूर्ण शब्दावली

  • GST (माल और सेवा कर)

  • वित्त आयोग (जैसे 15वां, 16वां)

  • केंद्र प्रायोजित योजनाएं (CSS)

  • FRBM अधिनियम (राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन)

  • अंतर-राज्यीय परिषद

  • GST परिषद

  • राज्य वित्त आयोग (SFC)

  • पंचायतों को हस्तांतरण की स्थिति रिपोर्ट 2024

  • राजकोषीय स्वास्थ्य सूचकांक (Fiscal Health Index)


🧩 वित्तीय संघवाद क्यों जरूरी है?

  1. भारत एक संघीय देश है – केंद्र और राज्य दोनों के पास शक्तियां हैं।

  2. राज्य ज्यादा ज़मीनी काम करते हैं – जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़कें।

  3. पर राज्यों के पास पैसे कम होते हैं, जबकि केंद्र के पास ज़्यादा।

  4. वित्तीय संघवाद पैसे का सही बंटवारा करता है – केंद्र और राज्यों में संतुलन बनाता है।

  5. इससे सहकारी संघवाद (साथ मिलकर काम) और प्रतिस्पर्धी संघवाद (राज्य आपस में आगे निकलने की होड़ में) को बढ़ावा मिलता है।


📜 संवैधानिक और नीतिगत प्रावधान

  1. कर शक्तियों का विभाजन (अनुच्छेद 246 और सातवीं अनुसूची)

    • केंद्र: आयकर, सीमा शुल्क

    • राज्य: उत्पाद शुल्क, भूमि राजस्व

  2. GST और अनुच्छेद 246A (101वां संविधान संशोधन)

    • अब केंद्र और राज्य दोनों GST वसूलते हैं

    • CGST + SGST (राज्य के अंदर)

    • IGST (राज्यों के बीच)

  3. राजस्व साझा करना (अनुच्छेद 270)

    • कुछ केंद्रीय कर राज्यों में बंटते हैं – जैसे आयकर, कॉर्पोरेशन टैक्स, CGST

  4. अनुदान (Grants-in-Aid – अनुच्छेद 275)

    • कमजोर राज्यों को केंद्र से अतिरिक्त मदद

  5. वित्त आयोग (अनुच्छेद 280)

    • हर 5 साल में गठित होता है – राज्य-केंद्र धन बंटवारे पर सुझाव देता है

  6. वैकल्पिक अनुदान (अनुच्छेद 282)

    • किसी भी सार्वजनिक कार्य के लिए केंद्र/राज्य अनुदान दे सकते हैं – पर यह विवेकाधीन है

  7. उधारी अधिकार (अनुच्छेद 293)

    • राज्य कर्ज ले सकते हैं, पर अगर केंद्र से पहले ही कर्ज है तो अनुमति लेनी होगी

  8. पंचायतों और नगर निकायों को शक्तियां (अनुच्छेद 243G, 243H, 243X)

    • स्थानीय सरकारों को धन, कार्य और अधिकार दिए जाएं

  9. सेस और अधिभार का बंटवारे से बाहर होना

    • केंद्र द्वारा वसूले गए सेस और अधिभार राज्यों को नहीं मिलते – इससे असंतुलन होता है

  10. केंद्र प्रायोजित योजनाएं (CSS)

    • केंद्र धन देता है लेकिन योजनाओं पर पूरा नियंत्रण रखता है – राज्यों की जरूरतें अनदेखी हो जाती हैं


🚨 भारत में वित्तीय संघवाद की मुख्य चुनौतियाँ

  1. ऊर्ध्व असंतुलन (Vertical Imbalance)

    • केंद्र के पास 63% राजस्व, लेकिन खर्च सिर्फ 38%

    • राज्यों के पास 37% राजस्व, पर खर्च 62%

  2. कर स्वायत्तता की कमी

    • GST के बाद राज्यों को कई करों से हाथ धोना पड़ा

  3. राजस्व में गिरावट

    • राज्यों का केंद्रीय करों में हिस्सा 35% से गिरकर 30% हो गया

  4. सेस और अधिभार में बढ़ोत्तरी

    • 5 साल में 133% बढ़े – पर राज्यों को नहीं मिलते

  5. उधारी की सीमा

    • राज्य सिर्फ GSDP का 3% तक कर्ज ले सकते हैं – संकट में ये काफी नहीं

  6. GST मुआवज़े में देरी

    • 2017 के बाद कई राज्यों को 19-33% नुकसान हुआ, लेकिन मुआवज़ा समय पर नहीं मिला

  7. CSS पर निर्भरता

    • योजनाएं बढ़ीं, राज्यों को "मैचिंग फंड" देना पड़ता है, पर डिजाइन का अधिकार नहीं

  8. अनुदान में गिरावट

    • ₹1.95 लाख करोड़ से ₹1.65 लाख करोड़ – राज्यों की स्वतंत्रता घटी

  9. क्षैतिज असंतुलन (Horizontal Imbalance)

    • बिहार जैसे गरीब राज्यों को ज़्यादा, केरल जैसे समृद्ध राज्यों को कम – इससे असंतोष

  10. असमान विकास

  • कुछ राज्य अब भी वित्तीय समावेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर में बहुत पीछे हैं

  1. बजट के बाहर उधारी (Off-budget Borrowing)

  • जैसे केरल इन्फ्रा फंड – अब इसे भी उधारी सीमा में गिना जा रहा है

  1. केंद्रीकृत खर्च

  • सिर्फ 22% फंड ही बिना शर्त है, बाकी सब शर्तों से बंधा

  1. पंचायतों को कमजोर Devolution

  • 11वीं अनुसूची में दिए गए 29 विषयों को पूरी तरह नहीं सौंपा गया

  1. PRI की समस्याएं

  • नेतृत्व की कमी, योजना समिति की कमज़ोरी, धन और प्रशिक्षण का अभाव

  1. स्थानीय स्तर पर राजकोषीय स्वायत्तता की कमी

  • राज्य वित्त आयोगों की रिपोर्टें लागू नहीं होतीं

  • पंचायतें अपने राजस्व नहीं जुटा पातीं – पूरी तरह निर्भर


🔧 भारत में वित्तीय संघवाद को कैसे सुधारें?

  1. राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ाएं

    • 16वां वित्त आयोग 41% से ज़्यादा हिस्सा दे

  2. सेस को व्यवस्थित करें

    • या तो इसे कम करें या साझा पूल में जोड़ें

  3. GST में सुधार करें

    • समय पर मुआवज़ा दें

    • पेट्रोल और शराब को GST में शामिल करें

  4. समग्र सूचकांक बनाएं

    • सामाजिक, वित्तीय और पर्यावरणीय मापदंडों से राज्यों की रैंकिंग

  5. संकट में ज़्यादा उधारी की छूट दें

    • कोविड जैसे समय में अस्थाई राहत

  6. पंचायतों को सशक्त करें

    • 243G, 243H, 243X को पूरी तरह लागू करें

  7. स्थानीय नेताओं को प्रशिक्षित करें

    • राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान जैसे कार्यक्रमों का विस्तार

  8. CSS योजनाओं का पुनर्गठन करें

    • कम, लचीली, असरदार योजनाएं बनाएं

  9. संवाद के मंच मज़बूत करें

    • अंतर-राज्यीय परिषद फिर से सक्रिय करें

    • GST परिषद, नीति आयोग को अधिक उपयोग करें

  10. HDI का उपयोग करें

  • संसाधन बंटवारे में केवल जनसंख्या नहीं, मानव विकास सूचकांक भी देखें

  1. उधारी में पारदर्शिता लाएं

  • बजट के बाहर की उधारी की पूरी जानकारी सार्वजनिक करें

  1. FRBM अधिनियमों को संरेखित करें

  • केंद्र-राज्य दोनों के लिए लचीला, साझा लक्ष्य तय करें

  1. Fiscal Health Index का उपयोग करें

  • खर्च सुधारें, कर्ज का बेहतर प्रबंधन करें


✅ निष्कर्ष: हमें क्या करना होगा?

  • भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के लिए मजबूत वित्तीय संघवाद जरूरी है।

  • राज्यों को ज़्यादा राजस्व हिस्सा मिलना चाहिए।

  • स्थानीय निकायों को सशक्त करना होगा।

  • राज्यों को योजनाओं की आज़ादी मिले।

  • "एक जैसा समाधान सबके लिए" वाला तरीका छोड़ना होगा।

👉 भारत को राष्ट्रीय लक्ष्य और राज्य की ज़रूरतों में संतुलन बनाना होगा – तभी होगा समावेशी और संतुलित विकास इस अमृत काल में। 💪🇮🇳

No comments

आज के 3 सबसे जरूरी करेंट अफेयर्स जो हर एग्जाम में आ सकते हैं

  🌍 माइक्रोप्लास्टिक संकट को कम करना (सरल नोट्स) 📰 क्यों चर्चा में? हाल ही में चेन्नई के समुद्र तटों पर एक अध्ययन में पाया गया: कुल म...

Powered by Blogger.