✅ [28 July 2025] Current Affairs for UPSC In HIndi – National Cooperation Policy 2025 & India's Climate Progress Explained
🧺 राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 और सहकारी संस्थाएं – सरल हिंदी में
स्रोत: द हिंदू (TH)
📰 खबरों में क्यों?
संयुक्त राष्ट्र ने 2025 को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष (IYC) घोषित किया है।
इस मौके पर भारत ने "राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025" लॉन्च की है ताकि सहकारी संस्थाओं को मज़बूत और जन-हितैषी बनाया जा सके।
🌍 अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष (IYC) 2025 क्या है?
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CoopsDay की शुरुआत 1923 में हुई, और इसे UN ने 1995 में मान्यता दी।
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यह हर साल जुलाई के पहले शनिवार को मनाया जाता है।
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2025 की थीम: “Cooperatives Build a Better World” 🌱
मतलब: "सहकारी संस्थाएं एक बेहतर दुनिया बनाती हैं" -
उद्देश्य: समावेशी और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देना।
🔹 दुनिया की 12% आबादी किसी न किसी सहकारी संस्था से जुड़ी है।
🔹 280 मिलियन (28 करोड़) लोग इनसे रोज़गार पाते हैं।
🔹 एक अरब से ज़्यादा सदस्य ICA (International Cooperative Alliance) के तहत आते हैं।
🇮🇳 राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 – मुख्य बातें
🪢 स्लोगन: “सहकार से समृद्धि”
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2002 की पुरानी नीति की जगह ये नई नीति लाई गई।
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20 साल (2025 से 2045) तक के विकास की योजना।
🔁 1. योजना एकीकरण (Scheme Convergence)
यह नीति कई योजनाओं से जुड़ी है, जैसे:
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डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (DIDF)
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पीएम मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY)
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राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD)
🎯 लक्ष्य: 5 साल में 2 लाख नई मल्टी-पर्पज़ PACS बनाना।
👥 2. समावेशी विकास और रोज़गार
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दलित, आदिवासी, महिलाएं और युवा – इन पर खास ध्यान।
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ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार और भागीदारी बढ़ाने की कोशिश।
📈 3. विविधीकरण (Diversification)
अब सहकारी संस्थाएं 25+ क्षेत्रों में काम करेंगी, जैसे:
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डेयरी, मत्स्य पालन, खाद्यान्न आदि।
🎓 4. शिक्षा
भारत का पहला सहकारी विश्वविद्यालय:
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त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय – सहकारी शिक्षा को बढ़ावा देगा।
💻 5. टेक्नोलॉजी और वैश्विक बाज़ार
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डिजिटल टेक्नोलॉजी से सहकारी संस्थाएं मॉडर्न बनाई जाएंगी।
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NCEL (National Cooperative Exports Ltd) – विश्वस्तर पर प्रोडक्ट्स बेचने में मदद करेगा।
🧾 सहकारी संस्थाएं क्या हैं?
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यह ऐसे लोग होते हैं जो मिलकर किसी आर्थिक/सामाजिक ज़रूरत को पूरा करते हैं।
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सिद्धांत: “एक सदस्य, एक वोट” – मतलब हर किसी की बराबर राय।
इतिहास:
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19वीं सदी में भारत में शुरुआत हुई – ग्रामीण शोषण से लड़ने के लिए।
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कानून: सहकारिता अधिनियम 1904 और 1912
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आज़ादी के बाद NABARD और NCDC ने इनका समर्थन किया।
📜 संविधान में सहकारिता का स्थान
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97वां संविधान संशोधन (2011)
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अनुच्छेद 19(1)(ग): सहकारी संस्था बनाने का अधिकार
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अनुच्छेद 43B (DPSP): सहकारिता को बढ़ावा देना
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भाग IXB (अनुच्छेद 243ZH – 243ZT): सहकारिता के संचालन के नियम
🔹 राज्य सरकार – राज्य स्तरीय सहकारिता
🔹 केंद्र सरकार – बहु-राज्य सहकारी संस्थाएं
सहकारिता मंत्रालय – 2021 में बना
MSCS संशोधन अधिनियम 2023 – पारदर्शिता बढ़ाने के लिए
📊 भारत में सहकारी संस्थाओं की स्थिति
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8.42 लाख सहकारी संस्थाएं
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29 करोड़ सदस्य
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दुनिया की 27% सहकारिता भारत में
🟢 IFFCO और Amul – दुनिया की शीर्ष सहकारी संस्थाएं
🟢 अमूल के संस्थापक – त्रिभुवनदास पटेल
🟢 श्वेत क्रांति के जनक – वर्गीज़ कुरियन
🧱 सरकार की प्रमुख पहलें
🏦 1. PACS सुधार
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नए मॉडल उपविधियाँ – पारदर्शिता लाने के लिए।
🌾 2. किसान उत्पादक संगठन (FPO)
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1900 FPOs बनाए गए (NCDC द्वारा)।
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छोटे मछुआरों को ट्रेनिंग व सहायता।
🧃 3. जैविक खेती
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NCOL (National Cooperative Organics Ltd) जैविक उत्पादों को बढ़ावा देता है।
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“भारत ऑर्गेनिक” ब्रांड शुरू किया गया।
🥛 4. श्वेत क्रांति 2.0 (2024)
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अगले 5 साल में 50% ज्यादा दूध की खरीद।
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9000+ डेयरी सहकारी रजिस्टर्ड।
🏦 5. बैंकिंग सुधार
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शहरी सहकारी बैंक – ज़्यादा शाखाएं खोल सकते हैं।
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ग्रामीण बैंक – कमर्शियल प्रॉपर्टी को लोन दे सकते हैं।
🛒 6. GeM पोर्टल
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सरकारी पोर्टल पर सहकारी संस्थाएं सामान खरीद सकती हैं।
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2024 तक 550+ सहकारी संस्थाएं इससे जुड़ीं।
⚖️ चुनौतियाँ
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UP, बिहार जैसे राज्यों में ढांचागत कमजोरी
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पिछड़े वर्गों में जागरूकता की कमी
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लोन नहीं मिलता – कागज़ कमजोर या जमानत नहीं
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ट्रेनिंग वाले लोगों की कमी
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टेक्नोलॉजी का धीमा अपनाना
🚀 अवसर
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नई नौकरियाँ: 2 लाख नई PACS
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निर्यात: NCEL के ज़रिए
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महिला और युवा भागीदारी
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डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन: पारदर्शिता, ऑडिट, टेक्नोलॉजी
🔚 निष्कर्ष
सहकारी संस्थाएं केवल व्यापार नहीं करतीं – ये एक-दूसरे की मदद से समाज को समृद्ध बनाती हैं। किसानों, महिलाओं और युवाओं को ताकत देती हैं।
राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025 का मकसद है – इन संस्थाओं को और भी मजबूत, आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय बनाना।
👉 “सहकार से समृद्धि” सिर्फ नारा नहीं – यह भारत को आगे बढ़ाने की राह है।
✍️ Mains उत्तर लेखन प्रैक्टिस
प्रश्न: दशकों से सहकारी संस्थाएं ग्रामीण भारत को सशक्त बनाती आई हैं। क्या आपको लगता है कि "राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025" समावेशी विकास ला सकती है? समझाइए।
🤔 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
❓1. सहकारी संस्था क्या है?
उत्तर:
एक ऐसी संस्था जिसमें लोग आपस में मिलकर खेती, डेयरी, बचत जैसे काम करते हैं।
हर सदस्य की बराबर राय होती है – “एक व्यक्ति, एक वोट।”
❓2. भारत ने यह नीति क्यों शुरू की?
उत्तर:
ग्रामीणों, महिलाओं, दलितों और युवाओं की मदद के लिए।
सरकारी योजनाओं से जोड़कर रोज़गार, सेवाएं और ईमानदार व्यापार बढ़ाना।
❓3. इस नीति का मुख्य लक्ष्य क्या है?
उत्तर:
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5 साल में 2 लाख नई PACS बनाना
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25 से ज्यादा क्षेत्रों में सहकारिता
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NCEL के ज़रिए निर्यात
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सहकारी शिक्षा को बढ़ावा देना
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टेक्नोलॉजी से पारदर्शिता लाना
❓4. PACS क्या है?
उत्तर:
PACS = प्राथमिक कृषि ऋण समिति
यह गांवों में किसानों को लोन और सेवाएं देती हैं।
❓5. अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 क्या है?
उत्तर:
संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित वर्ष – सहकारिता के योगदान को सम्मानित करने के लिए।
थीम: “Cooperatives Build a Better World”
🌍 भारत की जलवायु लक्ष्यों में प्रगति – आसान भाषा में
स्रोत: Indian Express (IE)
🗞 खबरों में क्यों?
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भारत ने जलवायु परिवर्तन से लड़ने में तेज़ी से प्रगति की है।
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एक बड़ा लक्ष्य 5 साल पहले ही पूरा कर लिया गया है।
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बाकी दो लक्ष्य भी पूरे होने के बहुत करीब हैं।
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ये सब पेरिस समझौता 2015 (Paris Agreement) का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य ग्लोबल वार्मिंग को कम करना है।
📘 पेरिस समझौता 2015 क्या है?
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यह एक वैश्विक जलवायु समझौता है जो COP21 (पेरिस) में 2015 में बना।
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मुख्य उद्देश्य:
🔹 ग्लोबल तापमान को 2°C से नीचे बनाए रखना
🔹 और 1.5°C तक सीमित रखने की कोशिश करना।
✅ भारत ने इस समझौते में 3 मुख्य वादे किए थे।
🇮🇳 भारत के 3 बड़े जलवायु वादे
1. गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा लक्ष्य 🎯
लक्ष्य: 2030 तक भारत की कुल बिजली का 50% गैर-जीवाश्म स्रोतों (सोलर, पवन, जल, न्यूक्लियर) से आना चाहिए।
उपलब्धि: 2024 में ही यह लक्ष्य पूरा!
कुल क्षमता (2024): 484.82 GW
इसमें से 242.78 GW (50%) स्वच्छ स्रोतों से है।
2. बड़ा कार्बन सिंक बनाना 🌳
लक्ष्य: 2030 तक 2.5–3 अरब टन CO₂ को सोखने के लिए पेड़ और जंगल विकसित करना।
2021 तक: 2.29 अरब टन का लक्ष्य पूरा हो चुका था।
2023 तक: पूरा लक्ष्य संभवतः पूरा हो चुका।
3. जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता घटाना 💨
लक्ष्य: 2030 तक CO₂ उत्सर्जन को 2005 की तुलना में 45% तक घटाना।
2020 तक: 36% की कमी आ चुकी थी।
➡️ 2030 तक पूरा लक्ष्य हासिल होने की उम्मीद है।
🧭 भारत क्या कर रहा है इन लक्ष्यों को पाने के लिए?
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National Adaptation Plan (NAP) – जलवायु बदलाव से निपटने की योजना
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NAPCC (National Action Plan on Climate Change) – 8 मिशनों की योजना
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Sovereign Green Bonds – हरित परियोजनाओं के लिए पैसा जुटाना
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MISHTI योजना – मैंग्रोव और समुद्री तटीय क्षेत्रों की रक्षा
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Mission LiFE – लोगों को पर्यावरण के अनुकूल जीवन के लिए प्रेरित करना
⚠️ अभी भी भारत को किन चुनौतियों का सामना है?
1. क्षमता बनाम वास्तविक उपयोग
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कुल बिजली क्षमता में 50% स्वच्छ स्रोत हैं
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लेकिन असली बिजली उत्पादन में सिर्फ 28% ही स्वच्छ ऊर्जा से होता है
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उद्योग, ट्रांसपोर्ट आदि को मिलाकर देखें तो सिर्फ 6% ही स्वच्छ ऊर्जा है
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जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोल, डीजल) अभी भी हावी हैं
2. सिर्फ सोलर पर निर्भरता
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2024 में 30 GW नवीकरणीय ऊर्जा जोड़ी गई
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उसमें से 24 GW सिर्फ सोलर थी
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पवन, जल और परमाणु ऊर्जा बहुत धीमी गति से बढ़ रही हैं
कारण: ज़मीन की कमी, देरी, पैसों की कमी
➡️ चीन इस क्षेत्र में भारत से 10 गुना तेज़ है
3. कार्बन सिंक की गुणवत्ता
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क्या हम असली जंगल उगा रहे हैं या सिर्फ एक ही प्रजाति के तेज़ पेड़ (monoculture)?
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मोनोकल्चर से जैव विविधता को लाभ नहीं होता
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शहरीकरण और भूमि उपयोग परिवर्तन से नुकसान हो रहा
4. उत्सर्जन डेटा की कमी
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2020 के बाद का डेटा साफ़ नहीं है
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जब डेटा ही सही नहीं, तो प्रगति कैसे नापें?
5. अभी भी जीवाश्म ईंधन का उपयोग
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स्टील, सीमेंट, ट्रांसपोर्ट जैसे क्षेत्र अभी भी कोयले और तेल पर निर्भर हैं
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इनको साफ़ करने का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है
6. जलवायु फंड की कमी 💰
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अमीर देशों ने $100 अरब/साल की मदद का वादा किया था
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लेकिन पूरा पैसा नहीं दिया
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भारत को लोन नहीं, ग्रांट (फ्री पैसा) चाहिए
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विकसित देश खुद भी अपने लक्ष्य पूरे नहीं कर पाए
✅ अब भारत को क्या करना चाहिए?
1. क्षमता और उत्पादन के बीच का अंतर खत्म करें
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बेहतर बैटरियाँ चाहिए – लिथियम-आयन, सोडियम-आयन
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स्मार्ट ग्रिड सिस्टम से सप्लाई और डिमांड को संतुलित करें
2. केवल सोलर पर फोकस न करें
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पवन, जल और न्यूक्लियर पावर को तेज़ी से बढ़ाएं
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परमाणु ऊर्जा को फंड और तेज मंजूरी मिले
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ग्रीन हाइड्रोजन और ऑफशोर विंड एनर्जी को बढ़ावा दें
3. समझदारी से जंगल उगाएं
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उपग्रह और GIS से वन क्षेत्र की निगरानी करें
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सिर्फ एक ही पेड़ न लगाएं – स्थानीय पेड़ लगाएं
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Miyawaki जैसे शहरी जंगल, एग्रोफॉरेस्ट्री को बढ़ावा दें
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अवैध कटाई पर सख्त कार्रवाई करें
4. ज्यादा जलवायु फंड के लिए लड़ें
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UN COP29 में अमीर देशों ने 2035 तक $300 अरब/वर्ष का वादा किया है – इसपर दबाव डालें
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ग्रांट को प्राथमिकता दें, लोन नहीं
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विदेश और निजी निवेशकों को आकर्षित करें
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स्थानीय रिसर्च और तकनीक को सहयोग दें
✍️ निष्कर्ष
भारत ने बहुत अच्छा किया है:
✅ 5 साल पहले गैर-जीवाश्म ऊर्जा लक्ष्य पूरा कर लिया
✅ बड़ा जंगल क्षेत्र तैयार किया
✅ जीडीपी की उत्सर्जन तीव्रता घटाई
लेकिन...
⚠️ स्वच्छ ऊर्जा का वास्तविक उपयोग अभी भी कम है
⚠️ कोयला और तेल पर निर्भरता बनी हुई है
⚠️ जंगल की गुणवत्ता और फंड की समस्या जारी है
➡️ भारत को अब ज़्यादा तेज़ कदम, फंडिंग, सख्त नियम और स्मार्ट टेक्नोलॉजी की ज़रूरत है।
🧠 Mains उत्तर लेखन अभ्यास
प्रश्न: भारत ने गैर-जीवाश्म ईंधन की क्षमता का लक्ष्य पहले ही पूरा कर लिया है। शेष ऊर्जा परिवर्तन की राह में आने वाली बाधाओं का आलोचनात्मक विश्लेषण करें।
🌿 FAQs – भारत की जलवायु प्रगति
❓ Q1. पेरिस समझौता 2015 क्या है?
उत्तर:
COP21 (पेरिस) में बना वैश्विक जलवायु समझौता। इसका उद्देश्य ग्लोबल तापमान को 2°C से नीचे और आदर्श रूप से 1.5°C तक सीमित करना है।
❓ Q2. भारत के 3 मुख्य जलवायु लक्ष्य क्या हैं?
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गैर-जीवाश्म क्षमता: 2030 तक कुल बिजली का 50% स्वच्छ स्रोतों से
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कार्बन सिंक: 2030 तक 2.5–3 अरब टन CO₂ पेड़ों से सोखना
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उत्सर्जन तीव्रता: 2005 के मुकाबले 45% की कमी 2030 तक
❓ Q3. क्या भारत ने ये लक्ष्य हासिल किए हैं?
✅ हाँ, कुछ हद तक:
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गैर-जीवाश्म ऊर्जा लक्ष्य: 2024 में ही पूरा
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कार्बन सिंक: 2023 तक संभवतः पूरा
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उत्सर्जन तीव्रता: 2020 तक 36% की कमी – 2030 तक लक्ष्य संभव
❓ Q4. क्षमता और उत्पादन के बीच का अंतर क्या है?
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50% क्षमता स्वच्छ स्रोतों से है
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लेकिन उत्पादन सिर्फ 28% ही है
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कुल ऊर्जा उपयोग (उद्योग, परिवहन आदि) में सिर्फ 6% ही स्वच्छ है
➡️ कोयला और तेल अब भी ज़्यादा इस्तेमाल हो रहा
❓ Q5. सोलर एनर्जी ही सबसे तेज़ क्यों बढ़ रही है?
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सोलर इंस्टॉल करना आसान और सस्ता है
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पवन, जल और न्यूक्लियर में दिक्कतें हैं:
🔹 ज़मीन मिलने में परेशानी
🔹 नीतिगत देरी
🔹 लागत ज़्यादा
🔹 निवेश की कमी
🎨 सोहराय, पट्टचित्र और पतुआ चित्रकला – भारत की पारंपरिक कलाओं की चमक
स्रोत: PIB
📰 खबरों में क्यों?
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Kala Utsav 2025 का आयोजन राष्ट्रपति भवन में हुआ।
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इसमें झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के पारंपरिक कलाकारों ने भाग लिया।
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प्रस्तुत कलाएं थीं:
✅ सोहराय – झारखंड
✅ पट्टचित्र – ओडिशा
✅ पतुआ – पश्चिम बंगाल
👉 इस कार्यक्रम का मकसद भारत की पुरानी लोक और जनजातीय कलाओं को समर्थन देना और कलाकारों को एक मंच देना है।
🎨 1. सोहराय चित्रकला – झारखंड की मिट्टी से जुड़ी कला
🔹 यह कला कहां से आती है?
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हजारीबाग जिला, झारखंड से
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जनजातीय महिलाएं बनाती हैं – जैसे कुर्मी, संथाल, मुंडा, उरांव, अगरिया आदि।
🔹 क्यों बनाई जाती है यह कला?
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फसल कटाई के समय बनाई जाती है
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यह पशुओं का स्वागत करने की परंपरा से जुड़ी है
🔹 "सोहराय" का अर्थ:
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"सोह" का अर्थ – भगाना
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"राय" – डंडा
👉 इसका मतलब – बुरी शक्तियों को भगाना और घर में शुभता लाना।
🔹 कैसे बनाई जाती है?
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महिलाएं दीवारों पर चावल के आटे से मंडलाकार (अरिपन) डिजाइन बनाती हैं
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सिर्फ उंगलियों से बनाई जाती है – ब्रश या पेंसिल नहीं प्रयोग होती
🔹 विशेष मान्यता:
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सोहराय-कोवर चित्रकला को 2020 में GI टैग मिला
(GI टैग – किसी विशेष क्षेत्र से जुड़ी विशिष्ट कला को सुरक्षा प्रदान करता है)
🎨 2. पट्टचित्र चित्रकला – ओडिशा का रंगीन इतिहास
🔹 पट्टचित्र क्या है?
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"पट्ट" = कपड़ा
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"चित्र" = चित्र/पेंटिंग
👉 ये धार्मिक चित्रकला होती है – खासकर भगवान जगन्नाथ और कृष्ण लीला से जुड़ी
🔹 कहां से आती है?
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ओडिशा, विशेष रूप से पुरी के जगन्नाथ मंदिर के आसपास
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मंदिर की दीवारों को सजाने के लिए उपयोग
🔹 कैसे बनाई जाती है?
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इमली के बीज की गोंद और चॉक पाउडर से कपड़े को तैयार किया जाता है
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रंग प्राकृतिक होते हैं – सब्जियों, खनिजों, और मिट्टी से बनाए जाते हैं
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कोई पेंसिल या कोयला नहीं प्रयोग होता
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पहले हल्के लाल या पीले रंग से बॉर्डर बनाते हैं, फिर रंग भरते हैं
🔹 अंतिम चरण:
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लाख की परत चढ़ाई जाती है – जिससे यह चमकदार और वॉटरप्रूफ बनती है
🎨 3. पतुआ चित्रकला – बंगाल की कहानी कहने वाली कला
🔹 कौन बनाता है?
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पतुआ या चित्रकार समुदाय बनाते हैं – हिंदू और मुस्लिम दोनों
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यह कला बिहार, झारखंड, ओडिशा और बांग्लादेश में भी मिलती है
🔹 किस पर बनाई जाती है?
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कपड़े की स्क्रॉल (पट्टा या पाटी) पर बनाई जाती है
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पीछे से इसे पुरानी साड़ी के कपड़े से मजबूत किया जाता है
🔹 उपकरण और रंग:
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ब्रश – बांस और बकरी के बाल से बनते हैं
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रंग – सब्जियों से बनाए जाते हैं और गोंद से टिकाए जाते हैं
🔹 क्या दर्शाया जाता है?
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इसमें मंगल कथा (शुभ कथाएं) सुनाई जाती हैं
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बंगाल के कालीघाट और कुम्हारटोली जैसे क्षेत्रों में प्रचलित
✍️ निष्कर्ष:
भारत की पारंपरिक चित्रकलाएं:
✅ लोक संस्कृति और प्रकृति से जुड़ी होती हैं
✅ महिलाएं और ग्रामीण समाज इन्हें पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाते हैं
✅ ये सिर्फ कला नहीं, एक जीवनशैली और आध्यात्मिक भावना की अभिव्यक्ति होती हैं
➡️ ऐसी कलाओं का संरक्षण भारत की संस्कृति, पहचान और अर्थव्यवस्था – तीनों के लिए ज़रूरी है।
🧬 भारत की पहली जनजातीय जीनोम अनुक्रमण परियोजना
Source: The Hindu
📢 खबरों में क्यों?
👉 गुजरात ने भारत की पहली जनजातीय जीनोम अनुक्रमण परियोजना (Tribal Genome Sequencing Project) शुरू की है।
इसका मकसद है – जनजातीय लोगों की DNA जांच कर उनके स्वास्थ्य को वैज्ञानिक ढंग से सुधारना।
🌿 गुजरात की जनजातीय जीनोम परियोजना क्या है?
1. 🎯 मुख्य उद्देश्य:
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सिकल सेल रोग (Sickle Cell) और थैलेसीमिया जैसे आनुवांशिक रोगों की पहचान करना
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DNA के आधार पर व्यक्तिगत (Personalized) इलाज देना
2. 🧪 कौन चला रहा है?
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यह प्रोजेक्ट Gujarat Biotechnology Research Centre (GBRC) द्वारा संचालित किया जा रहा है
3. 📊 कितना बड़ा प्रोजेक्ट है?
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17 जिलों के 2,000 जनजातीय लोगों के DNA का पूरा जीनोम अनुक्रमित (sequenced) किया जाएगा
🧬 जीनोम अनुक्रमण (Genome Sequencing) क्या होता है?
4. 📖 मतलब:
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इंसान के DNA में A, C, G, T नामक 4 रासायनिक अक्षर होते हैं
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इनका सही क्रम जानने को जीनोम अनुक्रमण कहते हैं
👉 यह बताता है कि किसी व्यक्ति में कौन-से रोग होने की संभावना है या कैसे दवाएं असर करेंगी
5. 🔍 जीनोम अनुक्रमण के प्रकार:
प्रकार | विवरण |
|---|---|
Whole Genome Sequencing (WGS) | पूरा DNA पढ़ा जाता है, पूरी जानकारी मिलती है |
Partial Genome Sequencing | सिर्फ कुछ हिस्सों का अध्ययन होता है |
Targeted Gene Sequencing | खास बीमारियों से जुड़े जीन को ही पढ़ा जाता है |
💊 जीनोम अनुक्रमण के फायदे क्या हैं?
6. 🧠 स्वास्थ्य में लाभ:
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रोग पैदा करने वाले खराब जीन की पहचान
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किसी दवा का असर पहले से जानना – जिससे सही दवा, सही मात्रा में दी जा सके
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साइड इफेक्ट कम होंगे
7. 🌾 खेती में भी उपयोग:
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अच्छी पैदावार, पोषण और रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले क्रॉप जीन की पहचान
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नई किस्में बनाने में सहायक
🔬 एक और प्रोजेक्ट: Genome India Project
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यह भारत सरकार का बड़ा राष्ट्रीय प्रोजेक्ट है
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10,000 भारतीयों के जीनोम का अध्ययन किया जा रहा है
👉 इसका उद्देश्य: भारत का एक आनुवंशिक नक्शा (genetic map) बनाना – जिससे इलाज, दवा और रिसर्च में मदद मिले
🌍 Henley Passport Index 2025 (Q2)
Source: The Hindu
1. 📈 भारत की रैंकिंग:
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2025 की दूसरी तिमाही में भारत की रैंक 77वें स्थान पर पहुंची (जनवरी 2025 में 85वां स्थान था)
2. 🌏 वीज़ा-फ्री देश:
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अब भारतीय पासपोर्ट धारक 59 देशों में वीज़ा-फ्री या वीज़ा-ऑन-अराइवल यात्रा कर सकते हैं
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फिलिपींस और श्रीलंका हाल ही में जोड़े गए हैं
3. 🥇 शीर्ष देशों की सूची:
रैंक | देश | वीज़ा-फ्री देश |
|---|---|---|
1st | सिंगापुर | 193 देश |
2nd | जापान & दक्षिण कोरिया | 190 देश |
4. 📊 Henley Passport Index क्या है?
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यह इंडेक्स 199 पासपोर्टों को 227 जगहों तक वीज़ा-फ्री पहुंच के आधार पर रैंक करता है
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डेटा आता है IATA (International Air Transport Association) से
👉 IATA का मुख्यालय मॉन्ट्रियल, कनाडा में है – यह एक वैश्विक एयरलाइन संगठन है

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